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और इन सभी लोगों को अपने समुदाय में रखें और उन्हें अपने स्तर तक लाएं और इस प्रकार सिखों में अनुसूचित जातियों को समाप्त कर दें।
श्री देशबंधु गुप्ताः इससे पहले कि आप संशोधनों को सदन के मतदान के लिए रखें, मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या डॉ. अम्बेडकर ने अपने आपको संतुष्ट कर लिया है कि दिल्ली में कबीरपंथी अनुसूचित जातियों के सदस्य हैं? जहां तक मुझे मालूम हैं दिल्ली में कोई मजहबी नहीं है और यदि उन्हें इस सूची में शामिल कर लिया जाये तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि कुछ मजहबी यहां आ गये होंगे। परन्तु जहां तक मेरी जानकारी है, कबीरपंथी अनुसूचित जातियों के सदस्य नहीं हैं। यदि डॉ. अम्बेडकर ने इस संबंध में अपनी संतुष्टि कर ली है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं। परन्तु यदि उन्होंने अपनी संतुष्टि नहीं की है और महज इसलिए कि पंजाब और पेप्सू में उनकी ऐसी स्थिति है, उन्हें दिल्ली में भी वैसा नहीं माना जाना चाहिए।
सरदार हुकम सिंहः मैंने यह कहीं नहीं कहा है कि वे हिन्दू होंगे या सिख होंगे। मुझे समझ नहीं आता कि कुछ माननीय सदस्य ऐसी बातें क्यों उठाते हैं। मैंने उस आदेश के बारे में जो जारी किया जा चुका है, जानबूझकर कुछ नहीं कहा और जब मुझे पता चला कि माननीय मंत्री स्वीकार कर रहे हैं तो मैंने कोई भाषण नहीं दिया। परन्तु अब चूंकि चर्चा आरम्भ की जा रही है, मुझे भी कुछ कहने की अनुमति दी जानी चाहिए। मैंने यह कभी नहीं कहा कि यह यहां भी करना होगा। यह भी राष्ट्रपति के आदेश में है कि जहां तक पंजाब और पेप्सू का संबंध है, इन जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल किया जायेगा। मैंने यही कहा है कि चाहे वे हिन्दू हों या सिख हों, वे अनुसूचित जातियों के सदस्य होंगे। चाहे वे हिन्दू हों या सिख हों, यह मान लिया गया है कि वे पिछड़ी जातियों के हैं।.....
माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री संशोधन स्वीकार कर रहे हैं।
प्रश्न यह हैंः
(एक) खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, अंत में निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जायेंः
फ्40 कबीरपंथी।
41 मजहबी।
(दो) खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, ‘हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक के अंतर्गत, अंत में, निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जायेंः
फ्28 बंजारा