34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 452

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सरकार ने यह सूची पहले ही स्वीकार कर ली है और इसी सूची के आधार पर, ये सभी लोग छात्रवृत्ति पर रहे हैं। अतः क्या हानि है यदि सरकार स्वीकार कर ले.......

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह इस विधेयक में नहीं हो सकता।

माननीय अध्यक्षः हमने खंड 2 पहले ही अंगीकार कर लिया है। खंड 2 किन्हीं राज्यों को प्रतिनिधित्व प्रदान करता है। वे राज्य इस संशोधन में शामिल नहीं किये गये हैं। मैं नहीं समझता कि यह संशोधन कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है? अतः मैं इसे नियमबाह्य घोषित करता हूँ।

प्रश्न यह हैः

फ्कि खंड 3, संशोधित रूप में, विधेयक का अंग बने।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 3, संशोधित रूप में, विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 1, विधेयक में जोड़ा गया।

विधेयक का पूरा नाम और अधिनियमन सूत्र विधेयक में जोड़े गये।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः

फ्कि विधेयक, संशोधित रूप में, पारित किया जाये।य्

माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव प्रस्तुत किया गयाः

फ्कि विधेयक, संशोधित रूप में, पारित किया जाये।य्

चौ. रणबीर सिंह (पंजाब)ः श्रीमन् मैं डॉ. अम्बेडकर का दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए धन्यवाद करता हूँ। परन्तु मैं साथ ही यह निवेदन भी करना चाहूंगा कि दिल्ली की समस्या बड़ी विकट है। दिल्ली में चार सीटें हैं जिनमें मुश्किल से एक सीट ग्रामीण क्षेत्रों के हिस्से में आती है। यदि ग्रामीण सीट को शहरी सीट के साथ मिला दिया जाये, तो इसका मतलब यह होगा कि एक पिछड़ी जाति की सीट दूसरी पिछड़ी जाति को दे दी जायेगी क्योंकि दूसरी सीट तो आरक्षित सीट है। मेरे विचार में दिल्ली के चालाक लोगों को नई दिल्ली के अफसरों और बड़े लोगों के बजाय दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को या तो अनुसूचित जातियों में शामिल कर लिया जाये या यदि माननीय मंत्री ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे लोग हरिजन नहीं हैं, तो उन्हें अनुसूचित जनजातियों में शामिल कर लिया जाये। माननीय मंत्री को उन्हें इस प्रकार एक सीट दिलाने की कोशिश करनी चाहिए। मैं जानता हूँ कि यह बहुत मुश्किल है। तो फिर मैं एक और सुझाव देता हूँ। एक सामान्य सिद्धांत है कि जहां