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राज्यों में रहने वाली अनुसूचित जातियों और जनजातियों को अनुच्छेद 335 और अन्य अनुच्छेदों के अंतर्गत दिये जाने की परिकल्पना की गई है।
अनुच्छेद 335 इस प्रकार हैः
फ्संघ अथवा किसी राज्य के मामलों से संबंधित सेवाओं और पदों पर नियुक्तियों के अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावों पर, प्रशासनिक कार्यकुशलता अक्षुण्ण रखते हुए, विचार किया जायेगा।य्
यदि अनुच्छेद 335 में वर्जित अनुसूचित जातियों और जनजातियों को अनुच्छेद 366 में परिभाषित अनुसूचित जातियों और जनजातियों, जो भाग क और भाग ख राज्यों की अनुसूचित जातियां और जनजातियां हैं, के संदर्भ में देखा गया तो भाग ग राज्यों में रहने वाली अनुसूचित जातियों और जनजातियों को संविधान के अनुच्छेद 335 का लाभ नहीं मिलेगा। इस एक गलती का यह परिणाम होगा कि........
माननीय अध्यक्षः शांति, शांति। क्या मैं माननीय सदस्य ने यह जान सकता हूँ कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सभी सदस्य विधि मंत्री की व्याख्या को मानने के लिए बाध्य हैं? ऐसी कोई बात नहीं है। हमने अभी यह विधेयक किसी ऐसे कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचे बिना अधिनियमित किया है कि यह व्याख्या ठीक है अथवा वह व्याख्या ठीक है। ऐसे निर्णय लेना न्यायालयों का कार्य है। न्यायालयों को अर्थ की व्याख्या करनी होती है।
श्री जे.आर. कपूरः श्रीमन्, मैं आदरपूर्वक यह निवेदन करना चाहता हूँ कि इस मामले में राष्ट्रपति को सलाह देना सरकार का और कैबिनेट का काम है और ये अनुसूचित जातियां और जनजातियां अनुच्छेद 335 के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित हो जाएंगी। जहां तक सरकार का संबंध है, उसे तो विधि मंत्री की व्याख्या माननी ही होगी।
माननीय अध्यक्षः और क्या वे अपनी राय नहीं बदल सकते?
श्री जे.आर. कपूरः मैं नहीं जानता कि वे अपनी राय बदलेंगे या नहीं। परन्तु अभी तक जैसा मैंने देखा है........
माननीय अध्यक्षः इस समय यह चर्चा एकदम अव्यावहारिक है। हमने अंततः विधेयक के एक विशिष्ट उपबंध को स्वीकार कर लिया है और जहां तक इस विधेयक का संबंध है, हमारा अनुसूचित जाति या जनजाति की किसी परिभाषा से या किसी अनुच्छेद से और अधिक मतलब नहीं है।
श्री जे.आर. कपूरः इसीलिए मैं कह रहा हूँ कि मैं केवल एक चेतावनी दे रहा हूँ।