440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री ज्ञानी राम (बिहार)ः निर्वाचन सूचियों में आपत्ति दाखिल करने का समय पिछले मार्च की 31 तारीख को समाप्त हो गया है। परन्तु अब किए गए संशोधनों को देखते हुए क्या अनुसूचित जातियों के लोग इस तारीख के बाद भी अपनी आपत्तियां दायर करने के हकदार होंगे?
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः यह प्रश्न नहीं उठता, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह अनुसूचित जाति का सदस्य हो या नहीं एक मतदाता के रूप में पंजीकृत होता है।
श्री ज्ञानी रामः जब कोई उम्मीदवार अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होता है, तब भी क्या यह प्रश्न नहीं उठता?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह प्रश्न नामांकन की तारीख को उठेगा।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न यह हैः
फ्कि विधेयक, संशोधित रूप में, पारित किया जाये।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
लोक प्रतिनिधित्व (संख्या 2) विधेयक
प्रवर समिति के प्रतिवेदन की प्रस्तुति
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, प्रवर समिति के सभापति की ओर से, मैं संसद के सदनों और प्रत्येक राज्य के विधानमंडल के सदन अथवा सदनों के निर्वाचनों के संचालन, उन सदनों की सदस्यता के लिए अर्हताओं और अनर्हताओं, ऐसे निर्वाचनों में या उनके संबंध में भ्रष्ट और अवैध व्यवहारों तथा अन्य अपराधों और ऐसे निर्वाचनों से या उनके संबंध में उत्पन्न हुई शंकाओं और विवादों के निर्णयों का उपबंध करने वाले विधेयक संबंधी प्रवर समिति का प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ।
श्री कॉमथ (मध्य प्रदेश)ः इस मामले के बारे में क्या मैं जान सकता हूँ, क्या सरकार ने कोई निर्णय लिया है कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के लिए कितने दिन नियत किए जायेंगे और कब यह सदस्यों के लिए कई तरह से सहायक सिद्ध होगा?
श्री जवाहरलाल नेहरू (प्रधानमंत्री और सदन के नेता)ः सरकार का विचार है कि इस विधेयक को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि जैसे ही वित्त विधेयक पर चर्चा समाप्त हो, यह विधेयक ले लिया जाये।
श्री कॉमथः इस पर चर्चा करने के लिए कितने दिन नियत किये जायेंगे?
श्री जवाहरलाल नेहरूः मैं नहीं बता सकता।
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 31 मार्च, 1951, पृष्ठ 5566