448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः क्या संविधान के अंतर्गत मंत्रियों की संख्या सीमित करना संभव है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सदन ऐसा कर सकता है।
श्री संथानम (परिवहन और रेलमंत्री)ः सदन ऐसा नहीं कर सकता। कृपया संविधान पढि़ए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है मैं माननीय मंत्री के साथ सहमत नहीं हूँ। संविधान में ऐसी कोई बंदिश नहीं है। संविधान केवल यह कहता है कि राष्ट्रपति को परामर्श देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी। संविधान यह नहीं कहता कि इसमें कितने मंत्री होंगे।
श्रीमती दुर्गाबाईः श्रीमन्, एक व्यवस्था का प्रश्न है...
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहती हैं। माननीय मंत्री उनकी बात सुनें।
श्रीमती दुर्गाबाईः अध्यक्ष महोदय, व्यवस्था के प्रश्न पर मैं यह जानना चाहती हूँ कि क्या माननीय मंत्री सरकार के विरुद्ध यह आरोप लगा रहे हैं कि जब भी अतिरिक्त मंत्री या उपमंत्री नियुक्त होंगे तो इसका प्रयोजन सदन को अशक्त करना होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उपाध्यक्ष महोदय को उत्तर दे रहा हूँ। मैं इस मुद्दे को छोड़ देना चाहता था। पर श्री कॉमथ चाहते थे कि मैं कुछ कहूँ।
माननीय अध्यक्षः मैं नहीं समझता कि इसमें कोई आरोप की बात है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे आशा है कि माननीय महिला सदस्य का इरादा मेरे तथा मंत्रालय के बीच रंजिश पैदा करने का नहीं है।
मैं अगले प्रश्न पर आता हूँ। दूसरा प्रस्ताव यह था कि रजवाड़ों को सदस्य चुने जाने से अनर्ह कर दिया जाये। यह बात श्री राजबहादुर और उनके मित्रों द्वारा उठाई गई थी। मुझे आशा है कि वह यहां मौजूद हैं।
श्री राजबहादुर (राजस्थान)ः मैं यहाँ हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्री रामा राव ने अपनी एक अलग विसम्मत टिप्पणी लगायी थी। श्री राजबहादुर और उनके साथियों का तर्क था कि रजवाड़ों का पद लाभ का पद है। मुझे लगता है कि यदि यह विचार सही है, तब तो इस विधेयक में किसी प्रकार का कोई खंड शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 102 में लाभ के पदधारियों को संसद का सदस्य बनने की पात्रता से वंचित