34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 464

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कर दिया गया है। इस निरर्हता को यह संसद न तो संशोधित कर सकती है, न इसका दायरा बढ़ा सकती है। माननीय सदस्य जो कर सकते हैं वह यह है कि अनुच्छेद 103 के अंतर्गत कार्यवाही करें जिसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति जो लाभ का पद धारण किए हुए हैं और संसद का सदस्य है, तो वह मामला राष्ट्रपति को निर्दिष्ट कर दिया जाये और राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग की राय लेने के बाद, उस राय के अनुसार अपना निर्णय देगा। इस ठोस उदाहरण लेते हुए, मान लीजिए कि कोई रजवाड़ा विशेष, इस सदन का या किसी राज्य के विधानमंडल का सदस्य चुन लिया जाता है, तो यदि मेरे मित्र की धारण सही है, जो भी आवश्यक है वह यह है कि राष्ट्रपति से निवेदन किया जाये कि वह व्यक्ति अनर्ह है। इसलिए संसद में स्थान ग्रहण नहीं कर सकता। इसलिए, स्वयं उनके तर्क के अनुसार उक्त प्रयोजन के लिए इस विधेयक में कोई खंड शामिल करना आवश्यक नहीं है। वह स्वयं बताएँ कि उनकी यह दलील कि लाभ का पद लाभ धारण कर रहे हैं, सही है या नहीं। इस विषय पर मैं अब कोई मत व्यक्त नहीं करना चाहता।

श्री सिधवाः उन्हें एक प्रकार की पेंशन मिलती है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पेंशनधारियों और इन मामलों के बीच भारी अंतर है।

श्री हुसेन इमाम (बिहार)ः सरकार के पेंशनधारियों के संबंध में क्या स्थिति है? क्या उनकी स्थिति लाभ के पद की मानी जायेगी?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं मामले के इस पहलू में नहीं जाना चाहता। बात बहुत सरल है। प्रश्न यह है कि यदि वे लाभ के पदों पर हैं, तो क्या वे अनर्ह होंगे। यदि ऐसी बात है, अनुच्छेद 102 मे निरर्हता दी हुई है। आपको केवल अनुच्छेद 102 को हवाला देकर ऐसे व्यक्ति को संसद से हटवा देना है।

श्री राजबहादुरः मामला फिर वकीलों के पास चला जायेगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः तो क्या हुआ? माननीय सदस्य स्वयं एक वकील हैं। वह अपने आपको इससे अलग क्यों रखें?

श्री श्यामनन्दन सहाय (बिहार)ः क्या यह मामला निर्वाचन आयोग के समक्ष नहीं उठाया जा सकता?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इतना लम्बा जाना अनावश्यक है। उपचार, जैसा मैंने बतलाया बहुत सरल है।

तो, यदि मेरे मित्र के विचार में कोई लाभ का पद उन्हें अनर्ह बनाने का अच्छा