452 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वितरणशील मतदान के संबंध में, मेरे दोनों मित्रों पंडित कुंजरु और श्री दास ने विस्तार से अपना मत व्यक्त किया है जिसकी हमारी पद्धति में अनुमति है। जैसा मैंने कहा, यह तर्क दिया जा सकता है कि संचयी प्रणाली इसलिए बेहतर है क्योंकि इसे अल्पसंख्यक, चाहे वे सामाजिक हों या राजनीतिक, इकट्ठे होकर अपना प्रतिनिधि सदन के लिए चुन सकते हैं। जैसा मैंने अभी-अभी कहा, हम इस विषय पर नये सिरे से शुरूआत नहीं कर सकते। मेरे मित्र को याद होगा कि इस मामले पर संविधान सभा में चर्चा हुई थी, तथा सरदार पटेल जैसे व्यक्ति द्वारा एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। उसमें उनकी अवधारणा थी कि सब अल्पसंख्यकों, जैसे मुसलमानों, ईसाइयों इत्यादि, के लिए समस्त विशेष प्रतिनिधित्व समाप्त कर दिया जाये तथा केवल अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के लिए इसे बनाये रखा जाये और इन दोनों वर्गों के लिए जब भी किसी निर्वाचन-क्षेत्र में कोई स्थान आरक्षित किया जाये, तो मतदान की प्रणाली वितरणशील मतदान प्रणाली होगी। वह संकल्प संविधान सभा द्वारा स्वीकृत कर लिया गया था। इसमें संदेह नहीं कि इस प्रश्न पर कुछ वाद-विवाद हुआ था। परन्तु अंततोगत्वा सभा का निर्णय वितरणशील मतदान के पक्ष में हुआ था। मैं समझता हूँ कि हमारी संसद को संविधान सभा द्वारा लिए गये निर्णयों का आदर करना चाहिए, क्योंकि आखिर संविधान सभा से ही अपने अपनी शक्ति और अधिकार प्राप्त किए हैं। संविधान सभा द्वारा लिए गये कुछ निर्णय हमारे संविधान में सम्म्लित कर लिए गये हैं, कुछ अन्य जो हम अपने संविधान में शामिल नहीं कर सके, अभी शेष रहते हैं। मैं दूसरे पक्ष की बात में निश्चय की कुछ औचित्य देखता हूँ, परन्तु मुझे लगता है कि इस विषय पर चाहे जो भी दृष्टिकोण हो, यह मामला निर्णीत समझा जाना चाहिए। यदि अगले या उसके बाद के निर्वाचनों में हुए अनुभव के आधार पर सदन इस परिणाम पर पहुंचता है कि यह प्रणाली अच्छी नहीं हैं, तो जो भी कदम वह उठाना चाहे उसके लिए वह स्वतंत्र है। परन्तु फिलहाल तो संविधान सभा का निर्णय बनाए रखा जाना चाहिए।
पांचवा मुद्दा परिणामों की घोषणा का है। यह भी मेरे मित्र श्री सारंगधर दास ने उठाया है। यदि मैंने उनकी बात सही समझी हैµयदि गलत हो तो वह मुझे सही कर दें, क्योंकि मुझे यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वह चाहते हैं कि निर्वाचन के परिणामों की घोषणा खंडशः नहीं, अर्थात् निर्वाचन-क्षेत्र वार, या राज्य वार, नहीं की जानी चाहिए, सब परिणाम एक ही दिन घोषित कर दिए जाने चाहिए। मेरी समझ में उन्हें गणना खंडशः निर्वाचन-क्षेत्र वार किए जाने में तथा उसका ब्यौरा पूरा किया जाने में, कोई आपत्ति नहीं है। मतगणना करने और घोषणा करने में अंतर है.......
श्री गौतम (उत्तर प्रदेश)ः मतगणना उम्मीदवार की उपस्थिति में की जाती है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बिल्कुल। ये उपबंध मौजूद हैं। प्रश्न केवल यह है कि निर्वाचन-क्षेत्र की मतगणना समाप्त होने पर, परिणामों को आप गजट में