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होंगे। दूसरे अनेक लोग ऐसे हो सकते हैं, जो अपनी अपंगता के कारण मतदान केन्द्र तक न जा सकें। क्या आप परिवहन के साधन की सहायता उनसे छीनकर उन्हें मतदान करने से वंचित नहीं कर देंगे?
श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः उनके मामले में अपवाद कर दीजिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसा मैंने कहा, मैं कोई बनी बनायी धारणा व्यक्त करके इस प्रश्न को समाप्त करने का प्रयत्न नहीं कर रहा हूँ। मैं मुद्दे के दोनों पहलू सदन के समक्ष रख रहा हूँ। निर्णय सदन के हाथ में हैं। व्यक्तिगत रूप से, मुझे कोई चिंतां नहीं होगी यदि गाड़ी का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दिया जाये जो भी मतदान करना चाहे, चल कर आये और मत दे। परन्तु इस तथ्य पर तो विचार करना ही है कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो चल कर जाने की स्थिति में नहीं हैं, और हमें उनके लिए कुछ न कुछ उपबंध करना चाहिए।
अब मैं एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर आता हूँ। निर्वाचन में सरकारी कर्मचारियों की सहायता लेना। यह प्रश्न श्री गोकुलभाई भट्ट और शायद श्री खंडूभाई देसाई द्वारा उठाया गया है। इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण उपबंध है और इस पर विचार करते समय इन बिन्दुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें मतदान के अधिकार एवं राजनीतिक दल बनाने अथवा किसी विद्यमान राजनीतिक दल की सहायता करने के मध्य अंतर करना चाहिए। जहां तक मतदान के अधिकार का प्रश्न है, इस देश में किसी को भी इस अधिकार से वंचित नहीं किया गया है, न तो सरकारी सिविल सेवाओं के कर्मचारियों को और न ही सैनिकों को। जिस प्रश्न पर विचार किया जाना है, वह यह है कि क्या उन्हें कोई राजनीतिक दल बनाने के लिये किसी संघ का निर्माण करने अथवा किसी विशिष्ट राजनीतिक दल की सहायता करने का हक है। मेरी समझ में सरकार के असैनिक या सैनिक कर्मचारियों को दलगत राजनीति में भाग लेने की अनुमति देना सरकार के लिए विनाश के बीज बोने से कम नहीं है। यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए। यदि सरकारी सचिवालय के कर्मचारियों को सरकार के विरुद्ध राजनीतिक संगठन बनाने दिया जाता है, तो प्रशासन का क्या होगा? क्या वे उस सरकार के प्रति वफादार हो सकते हैं, जिसे वे राजनीतिक कार्यवाही से गिराना चाहते हैं? मुझे लगता है कि इससे सारा प्रशासन बिखर जायेगा। दूसरे, यह भी याद रखना चाहिएµऔर मैं इस बात पर इसलिए जोर दे रहा हूँ क्योंकि आमतौर पर इसे भुला दिया जाता हैµकि क्या सरकार की राजनीतिक पार्टी, मंत्रिगण आदि, पक्षपाती हैं या तटस्थ अथवा वह इस ओर की या उस ओर की तरफदारी करती है। यह मामूली बात है। महत्वपूर्ण बात है, प्रशासन की निष्पक्षता। मेरी समझ में, सरकार की अपेक्षा शासन तंत्र कहीं अधिक महत्व रखता है। और इस शासन तंत्र को यदि राजनीतिक दलों के साथ जुड़ने की अनुमति मिल जाये तो क्या प्रशासन तटस्थ रह सकता है? क्या वह उनका पक्ष नहीं लेगा जो