34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 471

456 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उसके साथ काम करते हैं और उनके प्रतिकूल नहीं होगा जो उसके साथ काम नहीं करते। ऐसे प्रशासन का क्या बनेगा? इसलिए, मैं अपने मित्र श्री खंडूभाई देसाई या श्री गोकुलभाई भट्ट के इस सुझाव के बिल्कुल विरुद्ध हूँ कि प्रशासन को राजनीति में भाग लेने की या सभाएं करके, प्रचार करके, पैसा जमा करने या अन्यथा किसी उम्मीदवार की सहायता करने की अनुमति दी जाये। मेरी राय में इससे सरकार के असैनिक और सैनिक दोनों अंग तितर-बितर हो जायेंगे।

श्री भट्ट (बम्बई)ः मेरे सुझाव के पीछे यह धारणा नहीं है।

श्री खंडूभाई देसाई (बम्बई)ः मेरे द्वारा विसम्मत टिप्पण में उठाये गये सामान्य सरकारी कर्मचारियों को किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने की अनुमति का जवाब आप नहीं दे रहे थे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने समझा था कि आपने सामान्य प्रकार से यह बात उठायी है, परन्तु यदि आपका इरादा कोई संशोधन प्रस्तुत करने का है तो इस मामले पर बाद में चर्चा की जायेगी। इस विषय पर मेरे पास काफी सामग्री है और मैं समझता हूँ कि इस मुद्दे पर मैं सदन को संतुष्ट कर सकूंगा।

श्री भट्टः जो सुझाव मैंने दिया है उसका संबंध प्रशासनिक पदों वाले अधिकारियों से नहीं है, अपितु केवल आम कर्मचारियों से है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मामूली कर्मचारी और बड़े कर्मचारी के बीच अंतर करना बहुत कठिन है।

एक और भी मुद्दा है जो चुनाव चिह्न के बारे में है। प्रवर समिति ने तय किया है कि धार्मिक तथा राष्ट्रीय चुनाव-चिह्नों का प्रयोग नहीं किया जायेगा। हमारे मित्र श्री दास और इससे श्री मान तथा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी इससे सहमत नहीं हैं। श्री दास इस उपबंध के पक्ष में हैं, परन्तु वह इसे और विस्तृत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि वर्जित चुनाव-चिन्हों की आभासी नकल की जा सकती है और चूंकि वे केवल सत्याभासी होंगे, वास्तविक नहीं, राजनीतिक दलों के सदस्यों के लिए इस उपबंध की अवहेलना करना संभव है। परन्तु, जैसा मैंने कहा आभासी की नकल को रोकने का उपबंध करने के लिए उपयुक्त शब्द ढूंढ़ना सम्भव प्रतीत नहीं होता। यह कठिनाई पार करने के लिए मुझे तो अभी तक कोई उपयुक्त शब्द नहीं मिले हैं। मेरे मित्र श्री मान और डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने आपत्ति की है। उनका कहना है कि ऐसे चुनाव चिह्नों की अनुमति दे दी जानी चाहिएµहिन्दू महासभा को अपने निर्वाचन अभियान के दौरान अपने ध्वज का प्रयोग करने की अनुमति होनी चाहिए। मेरा विचार है कि प्रवर समिति द्वारा भेजे गये प्रारूप में इस विधेयक में किया गया उपबंध बहुत अच्छा है क्योंकि चुनाव ऐसे मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए जिनका धर्म, संस्कृति आदि से कोई संबंध नहीं हो।