458 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः क्या विधेयक के पाठ में इस पर कोई प्रतिबंध है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसी कोई बात नहीं है, परन्तु मैं ‘निर्वाचन-व्यय’ शब्दों की न्यायिक व्याख्या की बात कर रहा था।
माननीय उपाध्यक्षः क्या इसका अर्थ निर्वाचन की प्रत्याशा में किए गये सारे व्यय से है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः शब्द ‘निर्वाचन’ पर जोर है। निर्वाचन का अर्थ ऐसी घटना से है, जिसकी एक शुरुआत है और एक अंत है। इसलिए, जो मैं कह रहा हूँ। वह यह है कि हमारा केवल उस व्यय से संबंध है जो एक निर्वाचन पर किया गया हो जिसका आरम्भ होता है और समापन होता है।
श्री कॉमथः हर चीज का होता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कुछ चीजों का शायद नहीं होता। कुछ चीजें सनातन होती हैµउनका न कोई आरंभ है, न कोई अंत। परन्तु निर्वाचन सनातन नहीं है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन से पहले किया गया कोई व्यय, चाहे वह उम्मीदवार द्वारा किया गया हो या पार्टी द्वारा, निर्वाचन-व्यय के अर्थ में नहीं आता। निर्वाचन आरम्भ होने से पहले कोई भी पार्टी कितना भी पैसा खर्च कर सकती है। वह
खर्च निर्वाचन-व्यय का भाग नहीं है। निर्वाचन के बाद, कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार कुछ भी करे। चुन जाने के बाद कोई भी उम्मीदवार लोगों को, खाद्य विनियमों के अंतर्गत, इम्पीरियल होटल में भोज के लिए आमंत्रित कर सकता है। यह निर्वाचन-व्यय का भाग नहीं है। इसलिए, इन दो बातों को छोड़कर, कोई भी राजनीतिक दल कितना भी व्यय करने को स्वतंत्र है। इस खंड में उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
श्री सिधवाः ‘निर्वाचन के दौरान’ के बारे में आपको क्या कहना है?
सेठ गोविन्द दासः खड़े हो गए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझसे जिरह मत कीजिए। मुझे बोलने दीजिए। यदि आप मेरी बात पूरी सुनेंगे तो शायद अंत में आपको कोई प्रश्न पूछने को नहीं रह जायेंगे।
अब मैं श्री सिधवा द्वारा उठाए गये ‘निवाचन के दौरान’ किए गये व्यय के मुद्दे पर आता हूँ। इस स्थिति पर हम ठोस रूप से विचार करें, कल्पनात्मक रूप से नहीं। जब चुनाव चल रहा होता है, तो क्या होता है? दो बातें हो सकती हैं। पहली, राजनीतिक सभाएं या राजनीतिक भाषण हो सकते हैं।
श्री सिधवाः राजनीतिक पैम्फलेट भी हो सकते हैं।