34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 475

460 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

परोपकारी व्यक्ति हो, मित्र हो या इस मामले में रुचि रखने वाला कोई और। इंग्लैण्ड के ट्रिब्यूनलों ने इस बारे में मार्गदर्शी सिद्धांत निर्धारित किए हैं कि किस प्रकार का व्यय निर्वाचन-व्यय के विवरण में दिखाया जाना चाहिए और यदि हमारे निर्वाचन ट्रिव्यूनल उन्हीं नियमों का पालन करें, तो राजनीतिक दलों को अपने राजीतिक विचारों के संवर्द्धन के लिए पैसा खर्च करने को पर्याप्त क्षेत्र है। यदि वे किसी विशिष्ट उम्मीदवार का हित-वर्द्धन करने वाला कोई काम करते हैं, तो वह व्यय उसका निर्वाचन-व्यय बन जाता है तो उस उम्मीदवार के निर्वाचन-व्यय विवरण में दिखाया जाना चाहिए। श्रीमन्, प्रवर समिति की रिपोर्ट तथा माननीय सदस्यों द्वारा दिए गये विसम्मत टिप्पणी से उठने वाले सभी मुद्दों पर मैं अपने विचार रख चुका हूँ।

श्री सतीश चन्द्र (उत्तर प्रदेश)ः निर्वाचन की अवधि क्या मानी जायेगी? निर्वाचन के प्रारम्भ और समापन का निर्धारण किस प्रकार किया जायेगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जहां तक समापन का प्रश्न है, न्यायालयों के अनुसार मतदान निर्वाचन का उपसंहार है।

निर्वाचन के प्रारंभ के बारे में, न्यायालय ने कहा है कि इसका निर्धारण तथ्य के आधार पर किया जाये।

सामान्यतया, जब तक कि कोई प्रतिकूल बात न हो, नामांकन की तिथि निर्वाचन के प्रारम्भ की तिथि होगी। किन्तु, यह भी बिल्कुल सम्भव है कि कोई उम्मीदवार निर्वाचन से बहुत पहले सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दे कि वह उम्मीदवार होगा। न केवल घोषणा, अपितु किसी दूसरे उम्मीदवार से आगे बढ़ने के लिए कुछ पैसा भी खर्च कर सकता है। ऐसी दशा में जिस तिथि को उसने सार्वजनिक रूप से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है, वह उसके मामले में निर्वाचन का प्रारम्भ मानी जायेगी।

डॉ. सी.डी. पाण्डे (उत्तर प्रदेश)ः तब हर एक की अपनी-अपनी तिथि होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसा मेरा ख्याल है। श्रीमन्, मुझे इतना ही कहना है।

माननीय उपाध्यक्षः मंत्री महोदय के वक्तव्य के बाद कोई भी अपनी उम्मीदवारी की खुली घोषणा करेगा।

श्री सौंधी (पंजाब)ः कुछ लोगों ने दिल्ली से अपने बारे में पहले ही घोषणा कर दी है। उनका क्या होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं जो कुछ कह चुका हूँ उसके आगे मुझे और कुछ नहीं कहना है और यह प्रस्ताव सदन के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करता हूँ।