462 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परन्तु मैं आपको एक बात का विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि कांग्रेस एक राजनीतिक दल के रूप में कभी निर्वाचनों में विलम्ब करने के पक्ष में नहीं रही है।
हम किसी डर के कारण निर्वाचनों में विलम्ब नहीं करना चाहते। हम सम्भव यथाशीघ्र निर्वाचन पूरा कराना चाहते हैं। कुछ कठिनाइयों के कारण सरकार पहले निर्वाचन नहीं करा सकी। कुछ दलों के मनों में डर है कि निर्वाचनों में कुछ और विलम्ब होगा। श्रीमन् मैं सरकार से निवेदन करता हूँ कि राष्ट्रपति द्वारा अपने अभिभाषण में घोषित कार्यक्रम के अनुसार नवम्बर-दिसम्बर में निर्वाचन करा लिए जाने चाहिए तथा उसके आगे कोई विलम्ब नहीं होना चाहिए।
ऽश्री गौतमः .......अब मैं अंतिम बिन्दु पर आता हूँ जो अवैध आचरण के बारे में हैं। डॉ. अम्बेडकर ने एक मुद्दे की बड़े परिश्रम से व्याख्या की, पर यह हममें से बहुतों को स्पष्ट नहीं हुआ, जैसा कि बीच-बीच में अनेक सदस्यों द्वारा उठाये गये प्रश्नों से प्रतीत होता है। निर्वाचन-व्यय के विवरण के बारे में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि....
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः स्पष्ट नहीं हुआ।
श्री गौतमः वह खंड इस प्रकार हैः
फ्इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित को अवैध आचरण समझा जायेगाःµ
(1) उम्मीदवार या उसके एजेंट के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई सार्वजनिक सभा करने अथवा कोई विज्ञापन, परिपत्र या प्रकाशन निकालने के संबंध में किया गया व्यय।य्
शब्दावली पर नजर डालिए, यह केवल प्रकाशन की बात नहीं है। यदि कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार के इश्तहार बांटता है, तो यह प्रचारित करना हैµफ्अथवा किसी भी अन्य प्रकार सेय् और इससे रास्ता खुल जाता है। मुझे वहीं स्पष्ट हुआ कि किस परिमाण तक या किस सीमा तक। खंड में आगे हैः
फ्अथवा किसी भी अन्य प्रकार से उम्मीदवार के निर्वाचन को प्रोन्नत या संघटित करने के लिए प्रयोजनार्थ, जब तक कि उम्मीदवार द्वारा उसे लिखित रूप में इसके लिए प्राधिकृत न किया गया हो।य्
यदि मैं उम्मीदवार होता हूँ, तो मैं समझता हूँ कि मेरे लिए यह असम्भव होगा कि........
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 9 मई, 1951, पृष्ठ 8375