34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 478

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एक माननीय सदस्यः आप एक उद्घोषणा कर रहे हैं।

ऽबाबू रामनारायण सिंह (बिहार)ः (हिन्दी में प्रस्तुत भाषण)ः श्रीमन्, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ.......

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अंग्रेजी में बोलिए।

बाबू रामनारायणः जी नहीं, अब हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं। अंग्रेजी में बोल कर हम स्वयं को अपनी दासता की याद क्यों दिलाएं?

डॉ. अम्बेडकर की एक बात मुझे बहुत अच्छी लगी। उन्होंने कहा कि जो कानून बनाये जा रहे हैं, उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि देश की कोई सरकार संसद सदस्यों को भ्रष्ट न कर सके। यह अच्छी बात है, परन्तु इसके लिए कोई उपबंध होना चाहिए और मैं समझता हूँ कि यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि सरकार में भ्रष्टाचार न हो क्योंकि यदि सरकार ही भ्रष्ट होगी तो सदस्य भी भ्रष्ट हो जायेंगे। होता यही है। इसलिए लक्ष्य यह होना चाहिए कि उनको भ्रष्ट होने का कोई अवसर प्रदान न किया जाये। दूसरे शब्दों में, देश में भ्रष्ट सरकार बिल्कुल नहीं होनी चाहिये।

ऽऽपंडित कृष्ण चन्द्र शर्माः इस बात को देखते हुए कि दूसरा पक्ष अपनी बात स्पष्ट करने के लिए यहां उपस्थित नहीं है, ये आरोप बेमानी हैं।

माननीय उपाध्यक्षः इसका संबंध कांग्रेस के निर्वाचनों से हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः संविधान के अंतर्गत, अब यह मामला निर्वाचन आयोग के हाथ में हैं, सरकार के हाथ में नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः निर्वाचन आयोग को इस मामले में सर्वोच्च बनाया गया है और प्रवर समिति की कार्यवाही से पता चलता है कि सामान्य निर्वाचनों तथा उप-निर्वाचनों दोनों के बारे में उसे और अधिकार दिए गये हैं। निर्वाचन आयोग को अधिकाधिक महत्व दिया गया है।

श्री कॉमथः माननीय सदस्य इस उपयोगी परिवर्तन का समर्थन करना चाहते हैं।

माननीय उपाध्यक्षः परन्तु हम विगत काल की छानबीन नहीं कर रहे हैं। वह इस विधेयक पर बोलें।

ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 9 मई, 1951, पृष्ठ 8413

ऽऽसं. वा., खंड 11, भाग II 9 मई, 1951, पृष्ठ 8415