34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 479

464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऽपंडित कृष्ण चन्द्र शर्माः ........अब मैं निर्वाचन व्यय के प्रश्न पर आता हूँ। जैसा प्रो. शाह ने कहा, अधिकतर व्यय या तो प्रचार और विज्ञापन में होगा या मतदाताओं को मतदान केन्द्रों पर ले जाने में। जहां तक प्रचार और विज्ञापन का संबंध है, यह व्यय उम्मीदवार की पार्टी को करना चाहिए। हमारी जो स्थिति है, उसे देखते हुए कोई व्यक्ति अपने पास से इतना खर्चा नहीं कर सकता_ उम्मीदवार किसी न किसी पार्टी का होगा और वह पार्टी यथासमय अपनी स्वयं की कार्य-पद्धति विकसित कर लेगी। प्रारम्भ में हम कुछ गलतियां कर सकते हैं, परन्तु जिस प्रकार अन्य देशों ने सही कार्यपद्धति विकसित कर ली हैं, हम भी प्रचार और विज्ञापन के उचित तरीके विकसित करने में पीछे नहीं रहेंगे। परन्तु इस बात पर मैं माननीय विधि मंत्री से सहमत नहीं हूँ कि पार्टी के स्तर पर किया गया व्यय उम्मीदवार द्वारा किया गया व्यय माना जाना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने यह नहीं कहा, मैंने इसका उलट कहा है।

पंडित कृष्ण चन्द्र शर्माः फिर ठीक है। उम्मीदवार का व्यय उसी व्यय तक सीमित रहना चाहिए, जो वह स्वयं करे अथवा उसकी ओर से उसका एजेंट या मित्र करे। इसलिए प्रो. शाह की यह शंका नहीं है कि व्यय बहुत अधिक होगा, क्योंकि मतदान केन्द्रों तक मतदाताओं का पहुंचाना आसान कर दिया गया है...

ऽऽडॉ. सी.डी. पाण्डे (उत्तर प्रदेश)ः इस विधेयक के प्रावधानों को लेने से पूर्व, मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा इस सदन के सदस्यों को दिए गये उस अभिनन्दन का उल्लेख करना चाहूंगा कि यह कोरस बालाओं की मण्डली है....

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है। यह बिल्कुल सही नहीं है कि मैंने सदन के बारे में यह बात कही। मैंने सामान्य संदर्भ में यह कहा था। इसका सदन से कोई संबंध नहीं था।

श्री आर. वेलायुधनः यह सदन के लिए नहीं कहा गया था।

डॉ सी.डी. पाण्डेः यदि उनका यह मतबल नहीं था तो.....

माननीय उपाध्यक्षः वह सदन के सदस्यों को निर्वाचित होने के बाद कोरस बालाएं नहीं बनने देना चाहते।

ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 9 मई, 1951, पृष्ठ 8460-61

ऽऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 10 मई, 1951, पृष्ठ 8464-65