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डॉ. सी.डी. पाण्डेः यह लगभग वही बात है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बिल्कुल नहीं। इसका संदर्भ भविष्य के सदस्यों से था।
डॉ. देशमुखः उन्हें इस सदन में अभी तक कोई ऐसे चरित्र नहीं मिले हैं।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः कम से कम मुझे कुछ अन्य सदस्यों सहित यह महसूस हुआ कि यह उल्लेख उचित नहीं था, और यदि यह उपयुक्त था, तो मैं इस उदाहरण को आगे बढ़ाना चाहूंगा। यदि हम सब ‘कोरस बालाएँ’ हैं, तो वह उस संस्था के मैट्रन हैं।
श्री श्यामनन्दन सहाय (बिहार)ः आप हो सकते हैं, हम नहीं हैं।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः वह उस संस्था के मैट्रन हैं।
श्री आर. वेलायुधनः श्रीमन, क्या यह एक आक्षेप नहीं है?
श्री राजगोपालचारीः यदि हम बार-बार कोरस बालाओं की बात करेंगे तो शायद वे भी आपत्ति करने लगें।
माननीय उपाध्यक्षः वास्तव में सदन की कुछ महिला सदस्यों ने मुझसे कहा कि मुझे हस्तक्षेप करना चाहिए था और ‘कोरस बालाओं’ का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए था। आजकल वे ऐसे मामलों के बारे में बहुत भावुक हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि उन्हें इससे नाराजगी है तो मैं क्षमा चाहता हूँ। मैंने कहा था कि हमने कुछ बातों का प्रावधान नहीं किया, तो अमुक स्थिति बन जायेगी। मेरा सदन के सदस्यों का उल्लेख करने का जरा भी इरादा नहीं था। मैं उन परिणामों की बात कर रहा था, जो सामने आयेंगे यदि कुछ सावधानियां नहीं बरती गयीं।
बाबू नारायण सिंह (बिहार)ः आपकी बात ठीक थी।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः यदि उनका मतलब यह नहीं था, तो मैं इस बात को यहीं समाप्त करता हूँ।
इस विधेयक के मुख्य उपबंधों पर पहले वक्ताओं द्वारा अच्छी तरह चर्चा की गई है और मैं केवल कुछ मुद्दों को लूंगा। मेरे लिए सबसे प्रमुख बात कांग्रेस द्वारा देश के निर्वाचन अभियानों में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग किया जाना है, जो नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय ध्वज तथा कांग्रेस द्वारा प्रयुक्त ध्वज के बीच बहुत मामूली सा अंतर है तथा लोगों में भ्रम पैदा करता है। अधिकारियों के लिए यह अन्तर करना बहुत कठिन होगा कि किसी ध्वज पर अशोक चक्र है या चर्खा है।