466 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कि दोनों के बीच अन्तर करने में कोई समस्या नहीं है।
ऽडॉ. सी.डी. पाण्डेः .........डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वह निर्वाचन-व्यय का विवरण दायर किए जाने के बाद में कोई कठिनाई नहीं देखते, क्योंकि निर्वाचन-व्यय का अर्थ है नामांकन के पश्चात् निर्वाचन पर किया गया व्यय। उनसे प्रश्न पूछा था कि नामांकन से पूर्व किया गया व्यय निर्वाचन व्यय में शामिल है या नहीं। उनका उत्तर था कि वह स्थिति पर निर्भर करता है, क्योंकि यदि किसी ने अपनी उम्मीदवारी उस दिन घोषित कर दी तो उसे उसी दिन से अपना व्यय-विवरण देना होगा। मेरे विचार में इतने बड़े फैलाव की अनुमति देना तथा निर्वाचन-व्यय और नामांकन व्यय की गई परिभाषा करना, अर्थात् नामांकन व्यय और निर्वाचन व्यय के बीच भेद करना बहुत ही कठिन और खतरनाक होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने ऐसा कोई अन्तर नहीं किया था।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः आपने कहा था कि वैध होने से पूर्व किया गया व्यय निर्वाचन व्यय नहीं है, अर्थात् नामांकन के वैध ठहराये जाने की तिथि तक किया गया व्यय शामिल नहीं किया जाना चाहिए। परन्तु जो शब्दावली है उसमें निर्वाचन पर किया गया सभी व्यय, चाहे वह नामांकन से पूर्व किया गया हो या बाद में, निर्वाचन-व्यय में शामिल है।
डॉ. राम सुभग सिंह (बिहार)ः नामांकन से पूर्व का नहीं।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः क्यों नहीं?
माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री जी के अनुसार, यह न्यायिक व्याख्या है।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः मुझे स्वयं निर्वाचन-व्यय का विवरण दायर करने का अनुभव है। इस प्रकार के भी खर्चे होते हें जैसे मतदाताओं की सूची हासिल करना, और इसे भी विवरण में शामिल करना होता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह सही है। परन्तु आपको सारे रजिस्ट्ररों की आवश्यकता नहीं होती। केवल प्रमाणित प्रविष्टि आवश्यक है। और इस पर आपका दो पैसे से अधिक खर्च नहीं होगा।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः मैं जो बात कहना चाह रहा हूँ वह यह है कि नामांकन व्यय और निर्वाचन व्यय के बीच अभी तक कोई रेखा नहीं थी, परन्तु भविष्य में हो जायेगी।
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 10 मई, 1951, पृष्ठ 8469-71