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माननीय उपाध्यक्षः शायद माननीय सदस्य यह सुझाव दे रहे हैं कि एक स्पष्टीकरण शामिल किया जाना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उनका सुझाव केवल यह है कि निर्वाचन-व्यय का विवरण दायर करने जैसा कोई उपबंध नहीं होना चाहिए तथा उम्मीदवार अपनी हैसियत के अनुसार खर्च करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः मैं राशि पर रोक नहीं लगाना चाहता, इससे निर्वाचन-व्यय का विवरण दायर करने में कठिनाई होती है कि नामांकन पूर्व का व्यय शामिल किया जायेगा या नहीं, कि निर्वाचन-व्यय शामिल किया जायेगा या नहीं, कि निर्वाचन-व्यय का अर्थ केवल नामांकन के बाद और मतदान के अंत तक किया गया व्यय है या नहीं। लगता है कि निर्वाचन-व्यय को एक नया अर्थ दिया जा रहा है। मैं यही कहना चाहता हूँ...
इसके बाद मैं एक सुझाव देना चाहता हूँ जो नाम वापस लेने के बारे में हैं। आपने इसमें कहा है कि उम्मीदवार के रूप में खड़े होने के लिए किसी पर कानूनी प्रतिबंध नहीं होगा। विभिन्न क्षेत्र बहुत से ‘डमी’ उम्मीदवार खड़े करते हैं और बाद में उनसे अपने नाम वापस लेने को कहा जाता है। या तो आप कहिए कि इस गोलमोल भाषा का कोई अर्थ नहीं है, अथवा यदि इसका कोई अर्थ है तो इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए, कोई कमी नहीं छूटनी चाहिए।
माननीय उपाध्यक्षः भाषा तो स्पष्ट प्रतीत होती है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रवर समित को निश्चिय ही इसे समझने में कोई कठिनाई नहीं हुई।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः खंड 122 (1) (क) कहता है फ्निर्वाचन में किसी व्यक्ति को उम्मीदवार के रूप में खड़ा होने या न होने, अथवा उम्मीदवारी से नाम वापस लेने, के लिए।य्
माननीय उपाध्यक्षः पहले भाग को इसके साथ पढ़ा जाना चाहिए, अर्थात् फ्किसी उम्मीदवार द्वारा प्रलोभन देने से तात्पर्य है रिश्वत देना, अर्थात्, कोई भेंट, पद का वादाय् आदि।
डॉ. सी.डी. पाण्डेः मान लीजिए कि मैं किसी उम्मीदवार को सलाह देता हूँ कि वह विधानसभा के लिए खड़ा न हो, क्योंकि विधान परिषद् में उसे लिए जाने का बेहतर अवसर है। क्या इसे भ्रष्ट आचरण कहा जायेगा? जहां तक इस उपबंध का प्रश्न है, मेरी समझ में इसके अनुसार यह भ्रष्ट आचरण होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह उप-खंड (1) के अंतर्गत नहीं आता। आप उसे बेहतर तथा अधिक विश्वस्त सम्भावना प्रदान कर रहे हैं।