470 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसका कोई समुचित कारण तो उन्हें देना चाहिए।
श्री राजबहादुरः इसका औचित्य यह है कि वह सामान्य व्यक्ति पर हावी हो जायेगा। इंग्लैण्ड में भी ‘लार्ड्स’, को हाउस आफ कामंस के स्थान के लिए लड़ने की अनुमति नहीं है, क्योंकि वे निहित स्वार्थों को सिद्ध करने का प्रयत्न करेंगे तथा सामान्य व्यक्ति के अधिकारों में हस्तक्षेप करेंगे। इसी प्रकार यदि आप इन लोगों को, जिनकी स्थिति इंग्लैण्ड के लार्डस् जैसी है, अनुमति दे देते हैं, तो वे सामान्य व्यक्ति के मामलों में हस्तक्षेप करेंगे तथा प्रतिक्रियावादी तत्वों का पक्ष लेंगे और देश की प्रगति में बाधक होंगे।
ऽऽश्री अलगेसनः ...........परन्तु मैं निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रत की अवधारणा के बारे में एक चेतावनी देना चाहता हूँ। उसे यह स्वतंत्रता विभिन्न प्रतिस्पर्धी राजनीतिक दलों के प्रति समान व्यवहार बनाए रखने के लिए दी गयी है। आयोग को यह सुनिश्चित करना है कि किसी राजनीतिक दल को अन्य राजनीतिक दल के ऊपर कोई अनुचित लाभ न मिले। निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता का यह अर्थ नहीं है कि बिना पक्षपात के यह सभी दलों के लिए असुविधा पैदा करें। यहां मैं संसद तथा राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन का उल्लेख करना चाहूंगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कि यह बात इस विधेयक की परिधि के बिल्कुल बाहर है। राष्ट्रपति का आदेश संसद के समक्ष रखे जाने पर इस बात पर बहस होगी।
माननीय उपाध्यक्षः मेरी समझ में माननीय सदस्य का आशय परिसीमन के प्रश्न के ब्यौरे में जाने का नहीं है। राष्ट्रपति का आदेश अभी जारी नहीं हुआ है और सदन के समक्ष रखे जाने पर उस पर चर्चा होगी। परन्तु यदि माननीय सदस्य सामान्य रूप से यह बताना चाहते हैं कि चूंकि निर्वाचन आयोग को वृहत अधिकार दिए गये हैं, अतएव आयोग को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए तो उसमें कोई आपत्ति वाली बात नहीं है।
श्री अलगेसनः मेरा ख्याल है मैं इस बात का उल्लेख कर सकता हूँ कि निर्वाचन आयोग ने अब तक अपना काम किस प्रकार किया है।
डॉ. देशमुखः माननीय सदस्य बताना चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग का अब तक का काम किस प्रकार का रहा है। इसमें कोई हर्ज नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जब निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में राष्ट्रपति का वास्तविक आदेश आयेगा, उस समय इस पर विचार होगा।
ऽऽवही, पृष्ठ 8485