472 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री घुलेः बिल्कुल ठीक, मैं अभी यही सोच रहा था कि चूंकि इस खंड का फैलाव विस्तृत है, यह पूर्व-अधिनियम में शामिल होगा और, जैसा कि आपने कहा, यह मौजूद है। इस विधान के बावजूद भी, कांग्रेसी-जन तथा अन्य सदस्य अपने-अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए पहले वाले निर्वाचन लड़े तथा उन्होंने अपने निर्वाचन-क्षेत्रों में मत मांगने के लिए प्रचार किया, परन्तु मेरे सम्मुख अभी तक कोई ऐसा उदाहरण नहीं आया, कि इस आधार पर किसी ट्रिब्यूनल ने कोई निर्वाचन अवैध ठहराया हो। इसलिए, जैसा मैं कह रहा था, श्री गोयनका की विमत टिप्पणी से मुझ पर जरा भी प्रभाव नहीं पड़ा, परन्तु डॉ. अम्बेडकर का भाषण सुनने के पश्चात् मैं कुछ उद्विग्न महसूस कर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि यह कानून पहले भी प्रवर्तन में था और उसके बावजूद कांग्रेसी, समाजवादी, साम्यवादी आदि सभी ने अपने-अपने राजनीतिक सिद्धांत प्रतिपादित किये, साथ ही अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए मत-याचना भी की। तो, अब कौन-सी असाधारण परिस्थिति पैदा हो गयी है। अच्छा होगा कि वाद-विवाद का उत्तर देते समय डॉ. अम्बेडकर इसे स्पष्ट करें।
ऽश्री वेंकटरमणः .........एक और बात है जो मैं नहीं समझ पा रहा हूँ। विधेयक के खंड 3 में प्रावधान है कि राज्य परिषद का उम्मीदवार संबंधित राज्य का निवासी होना चाहिए, परन्तु लोक सभा उम्मीदवार देश के किसी भी निर्वाचन-क्षेत्र से खड़ा हो सकता है। दोनों के बीच का अन्तर समझने में मैं असमर्थ हूँ। मुझे आशा है कि माननीय विधि मंत्री स्थिति को स्पष्ट करेंगे और सदन को बतायेंगे कि यह अन्तर क्यों किया गया है। खंड 3 के अनुसारः
फ्कोई व्यक्ति राज्य परिषद का प्रतिनिधि चुने जाने का तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह उस राज्य के किसी संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र का मतदाता न हो........य्
श्री श्यामानन्दन सहाय (बिहार)ः क्योंकि यह राज्यों की परिषद है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ, यही कारण है। और दूसरी लोक सभा है।
श्री वेंकटरमणः परन्तु किसी राज्य विशेष में रह रहा व्यक्ति, किसी अन्य राज्य का निवासी हो सकता है और उसे इस आधार पर अनर्ह नहीं किया जाना चाहिए कि वह उस राज्य का निवासी नहीं है। श्रीमन्, आप अपना ही मामला लीजिए। आप दिल्ली के निवासी हो गये हैं और अपने राज्य से निर्वाचन के लिए खड़े नहीं हो पायेंगे, क्योंकि आप वहाँ के किसी निर्वाचन-क्षेत्र में मतदाता नहीं है।
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 11 मई, 1951, पृष्ठ 8574-75