34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 488

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माननीय उपाध्यक्षः यदि मै अपने निर्वाचन-क्षेत्र के सम्पर्क में नहीं हूँ, तो मैं वहां से उम्मीदवार के रूप में क्यों खड़ा होऊँगा?

श्री वेंकटरमणः श्रीमन्, इस मुद्दे पर विचार किया जाना जरूरी है।

ऽश्री वेंकटरमणः .........कोई भी दल बिना यह बताये कि उसका उम्मीदवार कौन है, यह कहते हुए प्रचार नहीं करता कि फ्कांग्रेस को वोट दो, लिबरल पार्टी को वोट दो या लेबर पार्टी को वोट दो।य् परन्तु जैसे ही यह सूचना बाहर आती है, यह एक अवैध आचरण बन जाता है। यदि यह एक पर्वू उदाहरण बन भी गया है, तो अब समय आ गया है, इसमें परिवर्तन कर दिया जाये।

प्रो. रंगा (मद्रास)ः इंग्लैण्ड में क्या स्थित है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वही जो हमारे विधेयक में है, हमने कोई परिवर्तन नहीं किया है।

श्री वेंकटरमणः खंड 124 के उप-खंड (3) में आपने कहा है कि निर्वाचन के बारे में कोई ऐसा परिपत्र, या पोस्टर निकालना जिसमें स्पष्ट रूप से मुद्रक और प्रकाशक का नाम नहीं दिया जाता, अवैध निर्वाचन आचरण माना जायेगा। किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सबसे आसान तरीका यह है कि, मुद्रक का पता दिए बिना, अपने विरोधी की ओर से एक परिपत्र निकाल दे और उसका विरोध अनर्ह हो जायेगा।

माननीय अध्यक्षः जब तक कि उम्मीदवार स्वयं इसमें शामिल न हो, उसे अनर्ह नहीं किया जा सकता।

ऽऽप्रो. रंगाः .....जहाँ तक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष का प्रश्न है, मैं यह कहना चाहूँगा कि जिला न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाने की बात सोचना किसी भी प्रकार उचित नहीं है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से नीचे के स्तर के किसी भी व्यक्ति को ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष नहीं बनाया जाना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उच्च न्यायालय के इतने न्यायाधीश उपलब्ध नहीं होंगे।

प्रो. रंगाः ट्रिब्यूनलों की संख्या भी अधिक नहीं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कोई नहीं जानता कि कितनी याचिकाएं आयेंगी।

ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 11 मई, 1951, पृष्ठ 8578

ऽवही, पृष्ठ 8611