474 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रो. रंगाः फिर, निर्वाचन-व्यय पर अधिकतम सीमा भी लगायी जानी चाहिए। मेरे विचार में, इस बात को बाद में बनाये जाने वाले नियमों के लिए छोड़ना सही नहीं है। और इन नियमों को बनाने का कार्य, मैं आशा करता हूँ, संघ सरकार को सौंपा जायेगा, राज्य सरकारों को नहीं। इस संबंध में भी, मेरा सुझाव है कि माननीय विधि मंत्री इस मुद्दे पर विचार करें कि यह अधिकार राष्ट्रपति को, निर्वाचन आयोग की मंत्रणा से वहन करने क लिए सौंपा जाये।
ऽश्री आर.के. चौधरीः .........उदाहरण के लिए, इस उपबंध को देखिए जिसमें मतदाताओं के लिए गाड़ी का प्रबंध करना वर्जित है। भारत में अब तक जितने निर्वाचन हुए हैं, उनमें यदि इस नियम का कड़ाई से पालन किया गया होता, तो सारे निर्वाचन रद्द हो जाते। परन्तु, अब हम लौट कर पूरा प्रयत्न कर रहे हैं कि जो त्रुटियां रह गयी हैं उन्हें दूर कर दिया जाये और निर्वाचन के दिनों गलत काम करने वालों को कठोर दण्ड दिया जाये।
माननीय उपाध्यक्षः श्री रोहिनी कुमार चौधरी।
माननीय सदस्यः यह जो जबरदस्ती है।
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः क्या आप महिलाओं को अनर्ह करना चाहते हैं?
श्री आर.के. चौधरीः पहली बात मैं खंड 7 में उपबंधित निरर्हताओं के बारे में कहना चाहता हूँ। मुझसे पहले एक से अधिक वक्ताओं ने इस पर बोला है, पर मैं इसके पक्ष में कुछ और तर्क दूंगा।
ऽऽमाननीय उपाध्यक्षः मैं माननीय सदस्यों को दस मिनट देना चाहता हूँ और माननीय मंत्री को एक बजने में पांच मिनट पर बुलाऊँगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कि आज सुबह यह तय हुआ था कि मैं सोमवार को सुबह जवाब दूंगा।
डॉ. देशमुखः ये मुद्दे ऐसे हैं जो सदन के अधिकतर सदस्यों को स्वीकार हैं और मुझे आशा है कि उन पर पर्याप्त मतैक्य होने के कारण माननीय डॉ. अम्बेडकर उन्हें मान लेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, जब मेरे प्रस्ताव पर चर्चा प्रारम्भ हुई थी तो मैंने आपसे कहा था कि विधेयक में अद्योपात कोई सिद्धान्त प्रतिपादित नहीं किया गया है तथा प्रत्येक खंड का अपना गुणवगुण है और इसलिए यह बेहतर होगा। कि जब सदन के सम्मुख खण्डवार चर्चा प्रारम्भ हो तो प्रत्येक खण्ड पर अधिक ध्यान
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 12 मई, 1951, पृष्ठ 8632
ऽऽवही, पृष्ठ 8639-40