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दिया जाये। मैं नहीं समझता कि इस चर्चा के दौरान उठाए गये मुद्दों पर विचार रखने में मैं अधिक समय लूंगा। मैं जानता हूँ कि बहुत से सदस्य, जो अपने मत पर जोर देना चाहते हैं, उस समय अपना दृष्टिकोण व्यक्त करेंगे जब कि खंड सदन के सम्मुख प्रस्तुत किया जायेगा। और मैं निश्चित रूप से उनकी कठिनाई दूर करने का प्रयत्न करूंगा। वे अपने दृष्टिकोण पर सदन में चर्चा करने और सदन का समर्थन प्राप्त करने के लिए उचित संशोधन भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसको ध्यान में रखते हुए, विभिन्न उठाये गये मुद्दों पर मेरे लिए विस्तार से बोलना आवश्यक नहीं है। अतएव मैं संक्षेप में बोलना चाहूँगा और केवल उन मुद्दों को लूँगा जिनकी चर्चा के दौरान फिर से उठने की सम्भावना नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय मंत्री को कुछ समय लगेगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ।
माननीय उपाध्यक्षः तब सदन सोमवार 8.30 बजे मध्या“न पूर्व तक के लिए स्थगित होता है।
तत्पश्चात् सदन सोमवार, 14 मई, 1951 के साढ़े आठ बजे तक के लिए स्थगित किया गया।
लोक प्रतिनिधित्व (संख्या 2) विधेयक, 1951µजारी
ऽमाननीय उपाध्यक्षः अब सदन डॉ. अम्बेडकर द्वारा 9 मई को विचार के लिए प्रस्तुत लोक प्रतिनिधित्व (संख्या 2) विधेयक पर आगे विचार करेगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पिछले शनिवार को जब मैं अपने प्रस्ताव पर हुई सामान्य चर्चा का उत्तर देने को खड़ा हुआ था तो मैंने कहा था कि यद्यपि जो सदस्य उस प्रस्ताव पर बोले थे, उन्होंने अनेक मुद्दे उठाये, पर उनमें से कुछ ऐसे थे, जो संशोधनों के अंतर्गत आते थे इसलिए अपने उत्तर के दौरान उन पर बोलना अनावश्यक है, क्योंकि उन पर बेहतर उत्तर उस समय दिया जा सकता है, जब खंडवार प्रस्ताव सामने आयें। और इसलिए, मैंने कहा था, मैं उन मुद्दों तक अपने विचार सीमित रखूंगा जो संशोधनों के अंतर्गत नहीं आते। संशोधनों को देखने पर मैंने पाया कि ऐसे केवल तीन मुद्दे हैं जिनमें कुछ तथ्य हैं, परन्तु जो संशोधनों के अंतर्गत नहीं आते। अतएव मैं अपने विचार इन मुद्दों तक ही सीमित रखूंगा।
पहला ऐसा मुद्दा बाबू रामनारायण सिंह द्वारा उठाया गया था और प्रो. रंगा ने भी वह उठाया था। दोनों ने शिकायत की थी कि उनके अनुभव और सूचना के अनुसार, विभिन्न प्रांतों तथा राज्यों की सरकारें निर्वाचन अभियान में सक्रिय भाग ले रही हैं और
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 14 मई, 1951, पृष्ठ 8650-57