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श्री कॉमथ (मध्य प्रदेश)ः सभी ब्राह्मण नहीं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह वर्ग जो उदासीन है, मध्य वर्ग है। वह वोट देने की परवाह नहीं करता। उसका अस्तित्व सरकारी कार्यवाही पर निर्भर प्रतीत नहीं होता। उसके अनाज का भंडार पूरा नहीं, तो आधा भरा रहता है, और यह वर्ग जानता है कि बिना किसी सरकारी सहायता के यह एक मौसम से दूसरे मौसम और एक वर्ष से दूसरे वर्ष तक चल सकता है। इसलिए इसे परवाह नहीं है। यह मेरा अनुभव है। इसलिए इस समय हम जो कर सकते हैं, यह है कि इस वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों से कहें कि यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि इस वर्ग में राजनीतिक चेतना जागृत हो और यह निर्वाचन में भाग ले, ठीक जिस प्रकार उच्च और निम्न वर्गों के लोग लेते हैं। इसके लिए कोई कानूनी निदान की आवश्यकता नहीं है।
अब मैं अंतिम मुद्दे पर आता हूँ जो मेरे मित्र श्री सोनावने ने उठाया था। उन्होंने जो कुछ कहा था वह वास्तव में कोई तर्क नहीं था। वह कुछ तथ्य जानना चाहते थे। वह जानना चाहते थे कि मतदान की आने वाली प्रणाली क्या होगी? उनका ख्याल था कि पहले की तरह, मतपत्र पर कोई निशान लगाने की पद्धति अपनाई जायेगी। मेरे मित्र जानते होंगे कि एकल सदस्य निर्वाचन-क्षेत्र प्रणाली को जिसमें एक-व्यक्ति-एक-वोट पद्धति थी, निशान लगाना आवश्यक है। वोट देना बहुत कुछ एक पोस्ट कार्ड खरीद कर, उस पर पार्टी का पता लिखने और फिर सड़क के डाक-बक्से में उसे डाल देने के समान है। मतदाता को केवल यह करना है कि मतदाता क्लर्क के पास जाये और उससे मतपत्र ले जो एक कोरा दस्तावेज है। मतदाता को पहले से ही मालूम होगा कि हर उम्मीदवार को विशिष्ट रंग की मतपेटी उसके चुनाव-चिन्ह के साथ आबंटित की गयी है और यदि उसे पहले ही ठीक जानकारी हासिल है, तो वह उस मतपत्र को लेकर बिना कोई निशान लगाये, पेटी में डाल सकता है।
श्री सोनावने (बम्बई)ः रंग और चुनाव-चिन्ह के बारे में आपको क्या कहना है?
माननीय डॉ. बी.आ. अम्बेडकरः यह सुविधा की बात है।
श्री सिधवाः हर उम्मीदवार के लिए अलग पेटी?
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः जी हाँ, बिल्कुल नहीं तो फिर बात कैसे बनेगी?
अध्यक्ष महोदय, इन्हीं मुद्दों पर मैं विचार प्रकट करना चाहता था, क्योंकि इन पर कोई संशोधन नहीं आया है। मेरी समझ में इसी प्रकार का कोई ऐसा अन्य मुद्दा नहीं है, जिसके स्पष्टीकरण की अभी आवश्यकता हो।
इन शब्दों के साथ, मैं यह प्रस्ताव सदन की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करता हूँ।