480 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री कॉमथः क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ? यद्यपि विधि मंत्री ने कहा कि वे ऐसे मतदाताओं पर कोई जुर्माना नहीं लगाना चाहते, जो........
माननीय अध्यक्षः मैं समझता हूँ कि माननीय सदस्य स्पष्टीकरण द्वारा इसके गुण व अवगुण में जा रहे हैं।
श्री कॉमथः मैं केवल जानकारी चाहता हूँ।
माननीय अध्यक्षः जानकारी के रूप में वही बात आ रही है। साररूप में, यह फिर तर्क वाली बात बन जायेगी।
प्रश्न हैः
फ्कि संसद के सदनों और प्रत्येक राज्य के विधानमंडल के सदन अथवा सदनों के लिए निर्वाचन, उन सदनों के सदस्यों की अर्हताओं और निरर्हताओं, इन निर्वाचनों में अथवा उनके संबंध में होने वाले भ्रष्टाचार और अवैध आचरणों तथा अन्य अपराधों, और इन निर्वाचनों से अथवा इनके संबंध में उठने वाली आशंकाओं तथा विवादों का उपबंध करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में, विचार किया जाये।य्
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
माननीय अध्यक्षः अब हम विधेयक पर खंडवार विचार करेंगे। पहले खंड 2.......
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मेरा सुझाव है कि चूंंकि खंड 2 परिभाषा वाला खंड है, अतएव सबके बाद में लिया जाये।
माननीय अध्यक्षः ठीक है। तब खंड 2 अभी स्थगित है, और हम खंड 3 से प्रारम्भ करते हैं। मैं एक-एक करके संशोधन पुकारूँगा और जो माननीय सदस्य अपने संशोधन प्रस्तुत करना चाहें, वे यह बतायेंगे। यदि कोई संशोधन छूट जाये, तो मुझे बता दें।
ऽमाननीय अध्यक्षः यही ठीक है, पहले सदस्यगण अपना संशोधन प्रस्तुत करें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं प्रस्ताव करता हूँ किः
खंड 3 के उप-खंड (1) में, फ्ऐसा व्यक्ति अर्ह नहीं होगाय् शब्दों के स्थान पर फ्कोई भी व्यक्ति अर्ह नहीं होगा।य् शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।
यह केवल एक मौखिक संशोधन है।
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 14 मई, 1951, पृष्ठ 8657-58