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भावना संसद की सामान्य कार्यकुशलता में वृद्धि करना प्रतीत होता है। प्रत्येक वर्ग पर इस कसौटी से विचार करना अच्छा होगा। पहला वर्ग है, किसी विधान सभा की सदस्यता का एक वर्ष का अनुभव। मैं नहीं समझ पा रहा कि किसी ऐसे व्यक्ति का विधानसभा का एक वर्ष का अनुभव जो शिक्षित या साक्षर भी नहीं है, किस प्रकार कार्य-कुशलता बढ़ा सकता है। दूसरा वर्ग लीजिएः किसी स्थानीय स्वशासी निकाय जैसे नगरपालिका या जिला स्थानीय बोर्ड का सदस्य। यहाँ भी वही प्रश्न आता है। मुझे किसी नगर निगम या परिषद का अनुभव नहीं है, परन्तु जिला बोर्डों के बारे में कुछ जानकारी अवश्य है। मुझे याद है कि जिला स्थानीय बोर्डों के सदस्य ‘बाजार’ वाले दिन बैठक बुलाने को उत्सुक होते हैं ताकि वे वहाँ आ सकें, अपना यात्रा-भत्ता वसूल कर सकें, ‘बाजार’ से अपनी सप्ताह भर की या महीने भर की आवश्यकता की चीजें खरीदें और वापस चले जायें। (व्यवधान) मुझे मालूम नहीं_ अन्य लोग भी हो सकते हैं और मैं उस मामले के बारे में भी जानता हूँ (कुछ माननीय सदस्यः अभी नहीं) ऐसा मेरा अनुभव है। अब ग्राम पंचायत को लीजिए। मुझे नहीं मालूम कि एक ग्रामीण में जो ग्राम पंचायत का सदस्य है, क्या कुशलता होगी। पंचायतों के क्या कृत्य हैं? उनके क्या साधन हैं? उन्हें प्रशासन का क्या तकनीकी ज्ञान है? एक सरकारी कर्मचारी को लीजिए, जो पांच वर्ष सेवा में रहा है। उसे निश्चिय ही समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया का कुछ अनुभव, कुछ जानकारी होती है। (व्यवधान) सरकारी कर्मचारी ऊँचे चरित्र का व्यक्ति होता है, ऐसा मैं मानता हूँ। मुझे नहीं मालूम कि इसमें चौकीदार भी आता है। इस वर्ग के लिए भी मैं समझता हूँ वही बात लागू होती है। परन्तु यदि ‘सरकारी कर्मचारी’ से मेरे मित्र का अर्थ आई.सी.एस. अधिकारी या उच्च श्रेणी के सिविल अधिकारी से है, तो मेरे विचार में एक खतरा पैदा होने की संभावना है। अधिकतर ऐसे सरकारी कर्मचारी कुछ गोपनीय शासकीय रहस्यों को जानते हैं। मुझे ऐसी संभावना पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि वह अवकाश ग्रहण करने के पश्चात् विधायिका का सदस्य होने पर, इस गोपनीय जानकारी का प्रयोग कर सकता है। अगला मामला लीजिएµकिसी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में एक वर्ष के अनुभव वाला शिक्षक। गाँव के प्राइमरी स्कूल के शिक्षक को लीजिए। उसका कितना ज्ञान है, क्या जानकारी है?
सरदार हुकम सिंहः क्या इन लोगों के खड़े होने पर प्रतिबंध है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यही मेरा मुख्य तर्क है। मैं उस पर आ रहा हूँ। इसलिए इन सब में मुझे कुछ तथ्य दिखाई नहीं देता। अगला वर्ग लीजिए। किसी मान्यताप्राप्त समाज-सेवी संस्था में कार्यकर्त्ता। क्या मेरे मित्र सरदार हुकम सिंह महावीर दल की सदस्यता को उम्मीदवारी की अर्हता मानेंगे? मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अकाली दल का भी उल्लेख करना चाहूंगा। उनमें से कुछ संगठन बहुत खतरनाक है।