485
ऽखंड 4 (लोक सभा की सदस्यता)
श्री बी.के. दास (पश्चिम बंगाल)ः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँ किः
खंड 4 में, फ्जम्मू और कश्मीरय् शब्दों के बाद फ्अथवा अंडमान और निकोबार द्वीप समूहय् शब्द जोड़े जायें।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह प्रस्ताव स्वीकार करता हूँ।
सरदार हुकम सिंहः मेरा माननीय विधि मंत्री से अनुरोध है कि इस बात पर विचार करें कि क्या इस संशोधन को फ्निर्वाचनय् की परिभाषा में शामिल करना ज्यादा अच्छा नहीं होगा। खंड 2 के उप-खंड (घ) में कहा गया हैः
फ्‘निर्वाचन’ का अर्थ है संसद के किसी भी सदन या, जम्मू और कश्मीर को छोड़कर, किसी राज्य के किसी स्थान या स्थानों को भरने के लिए निर्वाचन........य्
जहाँ तक जम्मू और कश्मीर का प्रश्न है, उनके लिए उपबंध पहले ही कर दिया गया है और अंडमान और निकोबार को भी यहां सम्मिलित किया जा सकता है, ताकि अन्य किसी स्थान पर इसे दोहराने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
ऽऽश्री हुसेन इमामः इसमें कोई कठिनाई इसलिए प्रतीत नहीं होती कि वह व्यक्ति किसी भी राज्य में मतदाता होना चाहिए, आवश्यक रूप से उस राज्य में नहीं जहां से वह
खड़ा हुआ है। इसलिए राष्ट्रपति के लिए पसंदगी खुली हुई है और किसी भी ऐसे व्यक्ति को नामजद किया जा सकता है, जो देश के किसी भी निर्वाचन-क्षेत्र में मतदाता है।
माननीय उपाध्यक्षः इससे अंडमान और निकोबार के निवासी वंचित हो जायेंगे। निवासीय अर्हता के कारण वे किसी अन्य स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकते।
श्री संथानम (परिवहन और रेल राज्य मंत्री)ः क्या फ्चुने गयेय् में नामांकन भी शामिल है?
माननीय उपाध्यक्षः जी हाँ, निर्वाचन और नामांकन दोनों।
श्री सिधवाः क्या हम भाषा में संशोधन नहीं कर सकते? सरकार को तो निश्चय ही इस बात का ज्ञान होगा कि अंडमान में कौन क्या है और वह सुझाव दे सकती है कि किसे नामांकित किया जाये।
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 14 मई, 1951, पृष्ठ 8699-8700
ऽऽवही, पृष्ठ 8701-02