486 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः नामांकन के लिए संबंधित व्यक्ति को मतदाता भी होना चाहिए और निवास संबंधी अर्हता भी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सबसे सरल तरीका यह है कि इस संशोधन को स्वीकार कर लिया जाये। जैसा आपने कहा अड़चन 34 खंड (घ) से उत्पन्न होती है। अण्डमान में कोई संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र नहीं है और इसीलिए अन्डमान और निकोबार द्वीप समूह के लोगों को प्रतिनिधित्व देने में यह कठिनाई पैदा करेगा। इसलिए मेरी राय में यह संशोधन आवश्यक है।
माननीय उपाध्यक्षः भविष्य अपनी चिन्ता खुद कर लेगा। कोई भी संशोधन प्रस्तुत किया जा सकता है। ऐसी बात नहीं है कि यह अधिनियम अगले निर्वाचन तक बिना किसी संशोधन के ज्यों का त्यों बना रहेगा। हम बराबर अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। प्रश्न यह है किः खंड 4 में, फ्जम्मू और कश्मीरय् शब्दों के बाद फ्अथवा अंडमान और निकोबार द्वीप-समूहय् शब्द जोड़ दिए जाएँ।
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
ऽखंड 5 (विधान सभा की सदस्यता)
डॉ. देशमुखः श्रीमन्, क्या मुझे प्रो शिब्बन लाल का संशोधन पेश करने की अनुमति है?
श्री संथानमः प्रो. सक्सेना के ये संशोधन पारिणामी संशोधन हैं। इससे पहले खंड 3 और 4 पर इनकी अनुमति नहीं दी गयी थी।
डॉ. देशमुखः इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। हम यह सुविधा राज्य विधानसभा के निर्वाचन के लिए दे सकते हैं, यद्यपि संसद के लिए यह निषिद्ध है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, नहीं। निर्वाचन सूची दोनों के लिए एक ही है।
माननीय उपाध्यक्षः हाँ।
श्री सोनावनेः श्रीमन्, मैंने खंड 5 पर दो संशोधन दिये हैं, जिन्हें मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँ।
माननीय उपाध्यक्षः परन्तु मेरे पास उन संशोधनों की प्रति नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे पास भी नहीं है।
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 14 मई, 1951, पृष्ठ 8763-64