34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 502

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माननीय उपाध्यक्षः जब तक कि संशोधन की प्रति माननीय मंत्री को न दी जाये और सरकार उसे स्वीकार करने को तैयार न हो, मैं उसे स्वीकार नहीं कर सकता। मैं इस समय उसकी अनुमति नहीं दूंगा।

ऽश्री नजीरुद्दीन अहमदः किन्तु यदि हम भाग (क) में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को एक साथ रखेंगे तो भाग (ख) में पुनरावृत्ति हो जायेगी। किन्तु भाग (ख) का संबंध केवल अनुसूचित जातियों से है, इसलिए अधिक स्पष्टता के लिए भाग (क) के दोनों भागों अर्थात् अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को पृथक करने की आवश्यकता है। भाग (ख) उसी रूप में रहना चाहिए। वास्तव में अनुसूचित जातियां दो प्रकार की हैंः सामान्य अर्थों में समझे जाने वाली अनुसूचित जातियां और वे अनुसूचित जातियां, जिनका संबंध शिलांग की छावनी या नगरपालिका से है। छावनी क्षेत्र की अनुसूचित जातियों को अन्य क्षेत्रों की अनुसूचित जातियों से पूर्णतः पृथक रखने के प्रयोजन से मेरा सुझाव है कि अनुसूचित जातियों, तथा अनुसूचित जनजातियों पर अलग-अलग चर्चा हो।

माननीय उपाध्यक्षः इसमें कोई अस्पष्टता प्रतीत नहीं होती।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कोई अस्पष्टता नहीं है। संविधान में दो अलग-अलग अनुच्छेद होने से, हर जगह दो अलग-अलग खंड होने आवश्यक नहीं हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः माननीय मंत्री जी की प्रतिकूल प्रतिक्रिया की दृष्टि से, मैं नहीं समझता कि इस संशोधन पर जोर देने से कोई प्रयोजन सिद्ध होगा।

माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः

कि खंड 5 विधेयक का अंग बने।

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 5 विधेयक में जोड़ दिया गया।

खंड 6 (विधान परिषद सदस्यता)

यथा संशोधित विधेयक में जोड़ा गया

* खंड 7 (सदस्यता के लिए निरर्हताएँ)

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मेरा अनुरोध है कि खंड 7 को स्थगित कर दिया जाए।

ऽसं. 910-खंड 2,भाग- II, 14 मई 1961 पृ. 8706-12