490 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः अत्युत्तम! तब यह बदल दी जाएगी। क्या यह जरूरी है कि माननीय सदस्य अभी इस पर जोर दें?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः नहीं, श्रीमन्।
माननीय उपाध्यक्षः अगला संशोधन सं. 222 है, जिसमें कहा गया हैः कि खंड 10 के उप-खंड (1) में फ्राज्यों की विधान परिषदय् शब्दों के स्थान पर दूसरी पंक्ति में फ्राज्यों की प्रथम विधान परिषद्य् प्रतिस्थापित करें।
अब माननीय सदस्य कृपया यह स्पष्ट कर दें कि यह संशोधन किस बारे में है। या, वे इस पर जोर नहीं देना चाहते?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे पता नहीं चल रहा, मैं कहाँ हूँ। सदन इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि कोई ‘एक्रोबेट’ भी उसके साथ न चल पाए। मुझे इस मामले में देखना होगा।
माननीय उपाध्यक्षः हम कुछ समय के लिए विराम ले सकते हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः क्या हम कल तक स्थगित नहीं कर सकते? हम काफी तेजी से आगे बढ़े हैं।
माननीय उपाध्यक्षः यह सरल बात है। माननीय सदस्य अपना समय ले सकते हैं। हमें कोई जल्दी नहीं है। सं. 222 में वे चाहते हैं। कि फ्राज्यों की विधान परिषदय् के स्थान पर फ्राज्यों की प्रथम विधान परिषद्य् शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं। क्या वे यह इसलिए सोचते हैं कि यहाँ चक्रानुक्रम की व्यवस्था नहीं है?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः जी, श्रीमन्।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उप-खंड (2) में चक्रानुक्रम है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे अब अपना अर्थ स्पष्ट हो गया है। ‘प्रथम’ शब्द शामिल करने का सुझाव मुझे खंड 11 की दूसरी पंक्ति के इस नमूने से मिला थाµफ्प्रथम संविधान के प्रयोजन के लिए।य्
माननीय उपाध्यक्षः वह ‘ग’ प्रकार के राज्यों के निर्वाचक-मंडल से संबिंंधत है। वह केवल एक भाग से संबंधित है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उनमें कोई संबंध नहीं है।
श्री सिधवाः वे अब उलझन में पड़ गए हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह नहीं है कि वे संबद्ध नहीं हैं किंतु यह अच्छे प्रारूप का नमूना है।