6. प्रांतीय दिवाला (संशोधन) विधेयक - Page 51

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री विश्वनाथ दासः श्रीमन्, क्या मैं अपने माननीय मित्र को बीच में रोक सकता हूँ? मैंने यह स्पष्ट रूप से कहा था कि यह समवर्ती सूची में है और इसीलिए केन्द्रीय सरकार को इसे प्रांतीय सरकार और प्रांतीय विधानमंडलों के लिए छोड़ देना चाहिए। मैं जानता हूँ कि यह समवर्ती सूची में है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह कहने ही वाला था। निस्संदेह, इसे समवर्ती सूची में रखे जाने का कारण यह था कि इस प्रकार के मामले में एकरूपता होनी चाहिए और इसके अलावा कोई अन्य कारण हो भी नहीं सकता और यदि केन्द्र निर्णय ले तो एकरूपता होनी चाहिए। अतः यह केन्द्रीय विधानमंडल का अधिकार है कि वह इस विषय पर विधान बनाए।

इस प्रश्न के संबंध में कि दिवाला अधिनियम होना चाहिए अथवा नहीं, मेरा विचार है कि इस प्रकार के मामले में ऐसा कोई मुद्दा नहीं हो सकता। यदि मेरे माननीय मित्र यह चाहते हैं कि दिवाला अधिनियम होना ही नहीं चाहिए तो उनके लिए यह उपयुक्त होगा कि वे सदन के समक्ष संकल्प लाएं और कहें कि दिवाला से संबंधित सभी विधियों को समाप्त किया जाए।

श्री विश्वनाथ दासः मुझे यह बयान देने दिया जाए कि मैंने कभी यह नहीं कहा कि दिवाला विधि आवश्यक नहीं है। मैंने मात्र यह कहा है कि यह विधि अनावश्यक, अवांछनीय है और समाज में अनैतिकता को जन्म देती है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, और इसीलिए आवश्यक नहीं है। तथापि डॉ. पंजाबराव देशमुख, जो इस समय यहाँ नहीं है, द्वारा उठाए गए बिंदु पर मुझे आश्चर्य हुआ था जब उन्होंने कहा था कि विधेयक को परिचालित किया जाना चाहिए था। उन्होंने प्रवर समिति में स्थान स्वीकार किया है और मुझे इस बाबत पूरा विश्वास है कि दोनों स्थितियां पूर्ण रूप से असंगत हैं। उन्होंने जो कुछ भी कहा है, उसके बारे में मैं और कुछ नहीं कहना चाहता।

श्रीमती दुर्गाबाई द्वारा उठाए गए इस बिंदु के संबंध में कि विधेयक को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाना चाहिए, मैं इसके प्रति निर्देश करने के लिए बाध्य था क्योंकि मैंने उन्हें इस वचन पर अपना विधेयक वापस लेने के लिए राजी किया था कि जब मैं अपना विधेयक लाऊंगा तो मैं उनके विधेयक के बारे में भी कुछ कथन करूँगा। किंतु उसे वास्तविक अर्थ में, जैसा कि मैंने कहा, मुझे कुछ संदेह और कठिनाई महसूस होती है और इस सदन में मैं स्पष्ट रूप से यह नहीं कह सकता कि मैं विधेयक की इस प्रतिपादना को स्वीकार करूंगा कि विधेयक को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाए। वास्तव में, बैंच पर मित्रों में से किसी ने कुछ ऐसा कहा था जिसमें इस बात पर बल दिया गया था कि हमें इस प्रकार के उपाय को भूतलक्षी प्रभाव देने में बहुत सावधान रहना चाहिए।