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श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार)ः क्या आप संशोधन का समर्थन कर रहे हैं?
चौ. रणबीर सिहंः जी हाँ, मैं संशोधन के समर्थन में खड़ा हूँ।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री जी इस बीच में बोलना चाहते हैं। अतः हमें पहले उन्हें सुनना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः जी हाँ, मैं कुछ टिप्पणियाँ करना चाहूँगा।
इस संशोधन का उद्देश्य, निस्संदेह बहुत स्पष्ट है। अतः मुझे नहीं लगता कि केवल इसके प्रयोजन एवं उद्देश्य को देखकर, इस संशोधन पर आपत्ति की जा सकती है। लेकिन, प्रयोजन के अलावा इस संशोधन में कई ऐसे उपाय शामिल हैं, जिससे इसके प्रयोजन तथा उद्देश्य पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। अतः इसी दृष्टिकोण से मुझे इस संशोधन को स्वीकार करना कठिन लग रहा है।
इस नए संशोधन में राष्ट्रपति को ऐसी शक्तियां दी गई हैं, जिन्हें वह संशोधन के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। निस्संदेह, संशोधन का प्रस्तुतकर्ता सोच सकता है कि इस संशोधन का कोई राजनैतिक स्वरूप नहीं है। पर इस संशोधन में राष्ट्रपति को शामिल कर लेने से, उन्हें एक राजनैतिक स्वरूप मिल जाएगा, यद्यपि एक व्यक्ति के रूप में और एक राष्ट्राध्यक्ष के नाते राष्ट्रपति को सभी दलों और उनके कार्यकलापों से ऊपर माना जाता है। तथापि इसमें ये संदेह नहीं है कि इस विशेष संशोधन के लागू हो जाने पर राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह पर कार्रवाई करनी होगी और इस बारे में भी किसी को संदेह नहीं है कि मंत्रिमंडल एक राजनैतिक संस्था ही होती है। अतः यह बहुत मुश्किल होगा।
श्री कॉमथः मंत्रिमंडल में सभी दलों के सदस्य हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह एक अलग स्थिति है। इसलिए यह और भी मुश्किल होगा कि निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने के लिए कोई ऐसा संदेश न डाला जाए, जिस पर कोई दल आपत्ति करने लगे। अतः मेरा निवेदन है कि राष्ट्रपति को राजनैतिक परिप्रेक्ष्यः में शामिल करना गलत होगा, क्योंकि चुनावों के दौरान कई प्रकार की भावनाएं एवं दुर्भावनाएं भी उठाई जाने लगती हैं।
मैंने पाया है कि इस संशोधन में यह कहा गया है कि इसके उद्देश्यों की पूर्ति एक नियत प्राधिकारी द्वारा की जाएगी। पर इस संशोधन में इसका उल्लेख नहीं है कि वह विहित प्राधिकारी कौन होगा या उसे कौन विहित करेगा। और यदि विहित प्राधिकारी भारत के विभिन्न भागों की राज्य सरकारें या उन राज्य सरकारों के अधीन कार्यरत प्रशासनिक प्रतिनिधि हैं, तो भी हम इस प्रस्ताव में एक ऐसा बेहद हानिकारक राजनैतिक