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खंड 17 (परिभाषा)
ऽश्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल)ः मुद्दा यह है कि हमारी दो परिषदें हैं। इसलिए भ्रम की स्थिति न रहे, अतः हमें ‘राज्य परिषद’ को ‘विधान परिषद्’ कहना चाहिए, जैसा कि हम ‘उच्च सदन’ को ‘राज्य सभा’ कहते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे यह स्वीकार्य नहीं है। ये सभी शब्द ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’ में पहले ही परिभाषित हो चुके हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः तो मैं इस संशोधन पर जोर नहीं दूँगा।
माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः
फ्कि खंड 17, विधेयक का भाग है।य्
खंड 17, विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 18 (प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए रिटर्निंग अफसर)
सरदार हुकुम सिंह (पंजाब)ः मैं प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 18 में फ्जो सरकार का ऐसा अधिकारी होगा, जैसाय् कि बजाय फ्जिसकोय् प्रतिस्थापित करें।
ऽऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस संशोधन को स्वीकार करना मुश्किल है। मैं अपने मित्र सरदार हुकुम सिंह से सहमत हूँ कि कुछ सीमा तक हम गैर-सरकारी एजेन्सी पर निर्भर हो सकते हैं। निश्चित ही हमारा चुनाव भी ज्यादा त्वरित गति से कराया जा सकता है, यदि चुनाव आयुक्त के अधीनस्थ कर्मचारी, सरकार के प्रशासनिक वर्ग से इतर वर्ग से लिए जाएँ। लेकिन इसी से साथ हमें यह ध्यान रखना है कि सभी सरकारों और निकायों, जिनसे भारत सरकार ने सलाह ली है, ने इस पर जोर दिया है कि पूरी मशीनरी पूर्णतः सरकारी रखी जाए। ऐसी परिस्थिति में, मुझे डर है कि इस संशोधन को स्वीकार करना संभव नहीं है।
ऽऽऽश्री जे.आर. कपूरः मैं प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 20 के उप-खंड (2) के परन्तुक के अंत में जोड़ा जाएः फ्ऐसी स्थिति में सहायक चुनाव अधिकारियों में वरिष्ठतम सरकारी अधिकारी, कथित कार्य निष्पादित करेगा।य्
माननीय उपाध्यक्षः इसका निर्णय कौन करेगा कि उनमें वरिष्ठतम कौन है?
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 15 मई, 1951, पृष्ठ 8764-65
ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 15 मई, 1951, पृष्ठ 8765
ऽऽऽवही, पृष्ठ 8774-75