498 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री जे.आर. कपूरः इसका उत्तर काफी आसान है। एक ऐसी सरकारी सूची होती है जिसमें अधिकारियों की वरिष्ठता दी होती है।
माननीय उपाध्यक्षः लेकिन यदि वे अलग-अलग विभागों से हों?
श्री जे.आर. कपूरः यदि स्थिति यह है कि मेरे सुझाव से परेशानी दूर नहीं हो पा रही है, तो हम कोई ऐसी विधि खोज सकते हैं, जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा कि सहायक चुनाव अधिकारियों में से कौन-सा अधिकारी, कार्यों का निष्पादन करेगा। इसी तरह यदि संशोधन को वर्तमान स्वरूप में स्वीकार करने में कोई परेशानी है, तो नियम बनाते समय इसका ध्यान रखा जा सकता है। मेरा उद्देश्य यही है कि कोई भी चीज अनिश्चित न छोड़ी जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। यह याद रखना चाहिए कि हम तीन कार्यों पर विचार कर रहे हैंः नामांकन-पत्र की स्वीकृति, नामांकन-पत्रों की जाँच और कुछ निर्वाचन-क्षेत्रों में मतों की गणना। मुझे नहीं लगता कि इनमें से कोई कार्य इतना विशिष्ट है कि ऐसा कोई अधिकारी जरूरी है जिस पर हमें विश्वास हो या कोई दूसरा नहीं। अतः जब तक मेरे मित्र मुझे इस बात के लिए संतुष्ट न कर दें कि ये कार्य ऐसे हैं, जिनके लिए किसी विशेष चरित्र या विश्वस्त अधिकारी की जरूरत है, तब तक मुझे नहीं लगेगा कि कोई भी सहायक चुनाव अधिकारी इन कार्यों को वैसा नहीं कर पाएगा जैसा कि कोई अन्य।
श्री जे.आर. कपूरः यह परन्तुक के बारे में परिकल्पना मात्र है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र का विचार है कि अधिकारियों की श्रेणी बना दी जाए_ वरिष्ठतम, वरिष्ठतम में द्वितीय, कनिष्ठतम, आदि। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों किया जाना चाहिए, जब कि कार्य इस प्रकार के हों कि हमें निश्चिय हो जाए कि जिस व्यक्ति को कार्य दिया गया है, वह उसे ठीक प्रकार से संपन्न कर सकता है। अन्यथा, इससे प्रशासनिक कठिनाइयां भी पैदा हो सकती हैं।
माननीय उपाध्यक्षः मेरा विचार है कि इस संशोधन में एक मुद्दा है। चुनाव अयोग, चुनाव अधिकारी की सहायता के लिए एक या अधिक सहायक अधिकारी नियुक्त कर सकता है। तब मान लीजिए कहीं पर दो अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं और अचानक चुनाव अधिकारी बिना किसी निर्देश दिए कहीं चला जाता है। तब वहाँ उन दो सहायक अधिकारियों में से किसे कार्य करना होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उनमें कोई भी कर सकता है।
माननीय उपाध्यक्षः मान लीजिए उनमें प्रत्येक यह सोचे कि यह दूसरे का कार्य है। तब क्या होगा?