500 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यथा सहायक चुनाव अधिकारियों को ‘पदाभिहित व्यक्ति’ बना देता है और वे उसके पद-चिह्नों पर चलने लगते हैं। इसका यही अर्थ है।
पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः उनमें से कौन?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उनमें से कोई भी उसके पदचिह्नों पर चल सकता है। मुझे तो नहीं मालूम, पर मेरे माननीय मित्र श्री सन्थानम ने कहा है कि उनमें एक हो सकता है। फिर भी हम इस संभावना को मानेंगे कि वे दो हो सकते हैं। मान लीजिए यदि दो व्यक्ति आसीन हैं, तो दोनों ही ‘पदाभिहित व्यक्ति’ होंगे। तब कोई भी A या B के पास जा सकता है और दोनों ही चुनाव अधिकारी के कार्य संपन्न कर सकते हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः इसमें कठिनाई तब उत्पन्न होगी, जब चुनाव अधिकारी के रूप में कार्यरत प्रत्येक सहायक चुनाव अधिकारी, नांमाकन-पत्रों की जांच करने लगेगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है और मैं इस तथ्य की की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि कुछ असावधानीवश मैंने ‘कार्य’ की बजाय ‘कार्यों’ शब्द प्रतिस्थापित करने के लिए श्री नजीरुद्दीन अहमद का संशोधन स्वीकार कर लिया था। मुझे लगता है, वह सही नहीं था, मूल शब्द एकवचन था, अर्थात् ‘कार्य’ ही सही शब्द है। और इसी से कठिनाई पैदा हुई, क्योंकि वह नामांकन वाले दिन अनुपस्थित हो सकता है। लेकिन चुनाव अधिकारी जाँच वाले दिन उपस्थित रहेगा और वह उसी के द्वारा की जाएगी।
माननीय उपाध्यक्षः इस गलती को संशोधन के तीसरी बार के वाचन में ठीक किया जा सकता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि कोई सहायक चुनाव अधिकारी, जो नामांकन स्वीकार करता है, जाँच भी कर लेगा और मतगणना का कार्य भी संपन्न कर लेगा, ऐसा नहीं है।
श्री हनुमनथैयाः यह कठिनाई, फ्अपरिहार्यतः निवारितय् शब्दों के कारण है और किसी न्यायपीठ से इसकी व्याख्या कराई जा सकती है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसके स्थान पर आप कौन-से शब्द रखना चाहेंगे?
श्री हनुमनथैयाः मैं एक समाधान का सुझाव दूँगा। फ्अपरिहार्यतः निवारितय् शब्दों के स्थान पर फ्अनुपस्थितय् शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। तब कोई विवाद पैदा नहीं होगा।