34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 516

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उसे ‘अनुपस्थित’ नहीं रखना चाहता। यही मेरा मुद्दा है। एक बार जब वह कर्तव्य पालन के लिए नियुक्त हो जाता है और विशेषकर जब वह ‘पदाभिहित व्यक्ति’ बन जाता है, तो उसके लिए यह बाध्यकारी है कि वह अन्य कार्यों के बजाय इसी कार्य पर पहले ध्यान दे।

श्री हनुमनथैयाः तब इसका उत्तर न्यायपीठ में भी आसानी से दिया जा सकता है। ‘अपरिहार्यतः निवारित’ सबूत का मामला है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह सबूत का मामला हो सकता है।

श्री पी. बासी रेड्डीः किसी एक चुनाव अधिकारी को पहले ही प्राधिकृत क्यों न कर दिया जाए?

माननीय उपाध्यक्षः उन्होंने इसका उत्तर दे दिया है। यह बहस खिंचती चली जा रही है। यदि वह वास्तव में ‘अपरिहार्यतः निवारित’ है और यह केवल चुनाव अधिकारी तथा सहायक चुनाव अधिकारी के बीच का मामला है, तो इससे फर्क नहीं पड़ता। अब मुद्दा यह है कि चुनाव पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। इसे दूर करने की क्या संभावना है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं सोचता हूँ और जहाँ तक मैं इसे समझ सका हूँ यह चुनाव आयुक्त और चुनाव अधिकारी के बीच का विषय है।

श्री टी.टी कृष्णमाचारी (मद्रास)ः उप-खंड (2) में शब्द हैंः फ्प्रत्येक सहायक चुनाव अधिकारी, चुनाव अधिकारी के नियंत्रण में सभी कार्य निष्पादित करने के लिए सक्षम होगा।य् अतः यही इसकी सीमा है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसमें अंतिम भाग अधिनियमन का भाग नहीं है, वह इसका आरंभिक भाग है। चुनाव आयोग को यदि वह पता चलता है कि चुनाव अधिकारी ने बिना किसी अपरिहार्य कारण के स्वयं को अनुपस्थित रखा है, तो वह उसके विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है।

श्री हनुमयथैयाः जैसा कि उपाध्यक्ष महोदय ने बताया है, यह मामला चुनाव अधिकारी और सहायक चुनाव अधिकारी के बीच का हो सकता है। लेनिक चुनाव के उम्मीदवारों की क्या स्थिति है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उम्मीदवारों के लिए इतना ही साबित करना पर्याप्त होगा कि चुनाव अधिकारी अनुपस्थित था। लेकिन वह किसी अपरिहार्य कारण के परिणाम-स्वरूप अनुपस्थित था या उसके बिना, इस मामले पर चुनाव आयुक्त द्वारा विचार किया जाएगा।