34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 517

502 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित ठाकुर दास भार्गवः यह सिद्ध करना होगा कि वह ‘अपरिहार्यतः निवारित’ है या नहीं।

श्री राजबहादुरः क्या मैं श्री हनुमनथैया से एक प्रश्न पूछ सकता हूँ? इसका निर्णय कौन करेगा कि अनुपस्थिति, अपरिहार्य थी या नहीं-चुनाव आयुक्त या संबंधित अधिकारी? क्या चुनाव आयुक्त जानता है कि वह अपरिहार्यतः अनुपस्थित था या नहीं?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः अधिकरण को यह निर्णय करना होगा कि क्या वह अपरिहार्यतः निवारित था?

श्री शिवचरण लाल (उत्तर प्रदेश)ः मुझे लगता है कि इसमें केवल एक पंक्ति जोड़ दी जाए कि यदि सहायक चुनाव अधिकारियों की संख्या एक से ज्यादा हो, तो उनका चुनाव अधिकारी उनमें से किसी एक को वरिष्ठतम के रूप में नामित कर दें।

माननीय उपाध्यक्षः यह पहले ही कहा जा चुका है। यही श्री कपूर का संशोधन था। अब मैं श्री कपूर के संशोधन को सदन में विचारार्थ प्रस्तुत करता हूँ।

श्री हनुमयथैयाः मैं एक प्रस्ताव रखना चाहता हूँ...

माननीय उपाध्यक्षः वह बाद में लिया जाएगा।

श्री हनुमयथैयाः इस खंड के संबंध में मैं एक निश्चित प्रस्ताव रखना चाहता हूँ कि यह खंड, बाद में विचारार्थ लिया जा सकता है।

माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्खंड 20 पर आगे विचार विमर्श स्थगित किया जाए।य्

प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।

ऽश्री बर्मनः मैं अपने निजी अनुभव के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना चाहता हूँ। मेरे चुनाव-क्षेत्र में, दो जिले मिला दिए गए हैं और मंडल आयुक्त को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। तदनुसार हम उसके निजी सहायक को अपने नामांकन-पत्र देते रहे हैं, और यही स्थिति काफी समय से है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अगर मैं माननीय सदस्य को ठीक प्रकार से समझ पाया हूँ, तो उनका संशोधन इस प्रकार हैः फ्परन्तुक के अनुसार, जैसा वह इस समय है, चुनाव अधिकारी या उसकी अनुपस्थिति में सहायक चुनाव अधिकारी द्वारा तीन कार्य निष्पादित किए जा सकते हैं। वे हैंµनामांकन-पत्रों को स्वीकार करना, नामांकनों की

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 15 मई, 1951, पृष्ठ 8784-86