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जांच करना और मतगणना।य् इस बारे में मेरे माननीय मित्र अपने संशोधन द्वारा यह चाहते हैं, कि दो कार्य निष्पादित किए जाएँ, अर्थात्-नामांकनों की जाँच और मतगणना।
माननीय उपाध्यक्षः प्रयुक्त शब्दों के अनुसार, ‘जब तक दूसरा अपरिहार्यतः अनुपस्थित न हो, तब तक उन दो कार्यों को निष्पादित नहीं किया जाएगा।’
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः संशोधन सं. 248 में ऐसा कुछ भी नहीं है।
श्री बर्मनः मैं इसी खंड का विलोपन चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अर्थात् नामांकन की स्वीकृति का उप-खंड और शेष भाग रहेगा?
श्री सन्थानमः इस का परिणाम यह होगा कि चुनाव अधिकारी और सहायक चुनाव अधिकारी, दोनों ही ‘पदाभिहित व्यक्ति’ हो जाएँगे।
श्री बर्मनः जहाँ तक जाँच और मतगणना का संबंध है, दोनों ही महत्वपूर्ण कार्य हैं और उनका दायित्व चुनाव अधिकारी पर रहना चाहिए। और यदि वह अपरिहार्यतः अनुपस्थित हो, तो किसी सहायक चुनाव अधिकारी को उन्हें करना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः दोनों पक्षों में काफी अन्तर है।
श्री बर्मनः लेकिन, जहाँ तक नामांकन-पत्र स्वीकारने का संबंध है, मेरा निवेदन यह है कि नामांकन-पत्रों के जमा करने का कार्य कई दिनों तक चलता है। तब यदि अकेले चुनाव अधिकारी को उन्हें स्वीकारने के लिए प्राधिकृत किया जाएगा, तो उसे अपने केन्द्र में चौबीसों घंटे उपस्थित रहना होगा। यह हमेशा संभव नहीं होगा।
एक माननीय सदस्यः इसका समय प्रायः 11 से अपराह्न 3 बजे तक होता है।
श्री बर्मनः लेकिन यह सभी दिन करना होता है। इसके लिए कोई सहायक नामांकन-पत्र प्राप्त कर लेता है। वह केवल इसकी जांच भी कर लेता है कि नामांकन-पत्र, मतदाताओं की सूची के अनुसार ठीक है और आवश्यक राशि जमा कर दी गई है। बाद में एक नियत तारीख को चुनाव अधिकारी द्वारा पूरी जाँच की जाती है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि मेरे मित्र, नामांकन-पत्र को एक उच्चतम महत्वपूर्ण अधिकारी, जैसे सहायक चुनाव अधिकारी द्वारा नामांकन स्वीकारने पर आपत्ति क्यों कर रहे हैं और उसे केवल किसी सहायक द्वारा स्वीकारने को तरजीह दे रहे हैं।
श्री सन्थानमः मुद्दा यह है कि सहायक चुनाव अधिकारी इतना सक्षम हो कि वह चुनाव अधिकारी को सूचना दिए बिना भी, किसी भी समय नामांकन पत्र स्वीकार कर सके।