504 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः परन्तुक में यह कहा गया है कि केवल चुनाव अधिकारी ही ये कार्य निष्पादित करेगा। तीन प्रकार के कार्य सहायक चुनाव अधिकारियों के लिए जाते हैं। वैसे, वे सभी कार्य जो चुनाव अधिकारी कर सकता है, सहायक चुनाव अधिकारियों से भी कराए जा सकते हैं। परन्तुक के आरंभिक भाग में कहा गया है कि निम्न तीन कार्य सहायक चुनाव अधिकारियों द्वारा निष्पादित नहीं किए जाएँगें, सिवाय उन असमान्य परिस्थितियों के, जैसे चुनाव अधिकारी अपरिहार्यतः अपना कार्य करने से निवारित हो जाए। उन्हीं तीन कोटियों में से वह एक कोटि कम करवा सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ केवल जाँच और मतगणना के सिलसिले में सहायक चुनाव अधिकारियों को विंंचत रखा जाएगा, जब तक कि चुनाव अधिकारी उनके लिए अपरिहार्यतः निवारित न हो जाए। और जहाँ तक नामांकन प्राप्ति का संबंध है, चुनाव अधिकारी के उपस्थित होने की स्थिति में भी सहायक चुनाव अधिकारी उन्हें प्राप्त कर सकता है। या उसकी अनुपस्थिति में भी उसकी अपरिहार्यतः निवारित होने वाली स्थिति उत्पन्न ही नहीं होगी। अतः हमें मान लेना चाहिए कि वह अपरिहार्यतः निवारित नहीं है। वह कभी भी उपस्थित हो सकता है। फिर भी सहायक चुनाव अधिकारी नामांकन-पत्र ले सकता है। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। पर जाँच और मतगणना के लिए उसे ध्यान रखना होगा कि चुनाव अधिकारी अपने दायित्व से अपरिहार्यतः निवारित है। इसके लिए सहायक चुनाव अधिकारी न केवल अपने, बारिक चुनाव अधिकारी के गंभीर दायित्वों को भी निभा सकेगा। साथ में वह नामांकन-पत्र भी स्वीकार कर सकेगा। मान लीजिए जिलाधीश, चुनाव अधिकारी है। तब उपजिलाधीश, जो सहायक चुनाव अधिकारी हो सकता है, कह देगा कि जिलाधीश उपस्थित है, अतः वही स्वीकार करेंगे। ऐसा सामान्यतः होगा, और यह ठीक भी है। अतः मैं इस मुद्दे को माननीय मंत्री जी के लिए छोड़ रहा हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस परन्तुक में किसी परिवर्तन की जरूरत नहीं है। हम सभी जानते हैं, इसमें ‘गोलमाल’ होगा।
श्री भारतीः हम यह जानना चाहते हैं कि यहाँ ‘स्वीकारने’ का वास्तविक आशय क्या है? क्या यह केवल नामांकन प्राप्त करना है या उनकी अंतिम स्वीकृति भी है? इस तरह यह अंतिम अस्वीकृति भी हो सकती है?
माननीय उपाध्यक्षः इसका केवल यह अर्थ है कि प्राप्ति के बाद केवल आरंभिक जांच की गई है। यह ‘अंतिम स्वीकृति’ नहीं है।
ऽखंड 22 (चुनाव अधिकारी के सामान्य कर्तव्य)
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँः
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 15 मई, 1951, पृष्ठ 87590-9