506 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः अब मैं इस खंड को सदन के समक्ष रख रहा हूँ।
ऽश्री शिवचरण लालः जो मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ, वह यह है। यदि सरकार इस बारे में बहुत सख्त होना चाहती है कि किसी भी तरह के वाहन का प्रयोग न किया जाए, तो दूरी कम होनी चाहिए। यानी मतदान केंद्रों की संख्या अधिक होनी चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस पर पांच बातें कही गई हैं और मुझे कहा गया है कि मैं उन पर प्रत्येक के बारे में अपना वक्तव्य हूँ। उनमें पहली बात मतदान केन्द्रों की संख्या की है। इस बारे में मुझसे यह बताने को कहा गया है, क्या सरकार, मतदान केंद्रों की ऐसी व्यवस्था करेगी कि किसी विशेष केन्द्र में किसी निश्चित संख्या से ज्यादा मतदाता एकत्र नहीं हों। इस बारे में किसी निश्चित संख्या को बता पाना मेरे लिए अत्यंत कठिन है। तथापि मैं इतना कह सकता हूँ कि सरकार, मतदान केन्द्रों की संख्या का निर्धारण इस सीमा तक करेगी, ताक किसी एक मतदान केन्द्र पर मतदाताओं की संख्या उसकी क्षमता के अनुसार हो और उसकी दूरी इतनी हो कि मतदान केन्द्र तक जाने के इच्छुक मतदाता को दिक्कत न हो और वह दूरी या भीड़ के कारण मतदान न कर पाने से निराश होकर न चला जाए।
दूसरा प्रश्न यह उठाया गया है, मतदान केन्द्रों के निर्धारण के बारे में है। इस बारे में मुझे बताने को कहा गया है, क्या चुनाव आयुक्त का निर्णय इस बारे में अंतिम होगा या उन लोगों को, जो इसमें रुचि रखते हैं, चुनाव आयुक्त के समक्ष अपना पत्र रखने का अवसर मिलेगा। यह सुस्पष्ट है कि कुछ लोग, चाहे मतदाता हों, तो उम्मीदवार, किसी
खास मतदान केन्द्र को खास स्थान पर निर्धारित करने की इच्छुक हो सकते हैं, क्योंकि वह स्थान अपने लिए अनुकूल लग सकता है या वह उन्हें दूसरे उम्मीदवारों की तुलना में लाभप्रद हो सकता है। अतः किसी भी उम्मीदवार या मतदाता को इस बारे में अंतिम निर्णय की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसका पूरा अधिकार चुनाव आयुक्त के पास ही रहना चाहिए। किंतु मैं यह कहने के लिए राजी हूँ कि व्यवस्था करने से पूर्व, चुनाव आयुक्त अपना अंतिम निर्णय लेने के संबंध में संबंधित व्यक्तियों को आमंत्रित करके उनसे चर्चा कर सकता है और उसके बाद अपना अंतिम निर्णय ले सकता है।
अब मैं उन तीन मुद्दों पर आता हूँ जो चुनाव कराने से संबंधित हैं। पहला, प्रत्येक मतदाता को उसका मत-पत्र भेजने से संबंधित है। दूसरा, प्रत्येक मतदाता को निश्चित आकार का चुनाव घोषणा-पत्र सरकारी खर्च पर भेजने का है और तीसरा, किफायती दर पर निर्वाचक नामावली देने से संबंधित है। यह सदन भी इस बात से सहमत होगा कि इसमें होने वाले खर्च की संभावना हो देखते हुए, मेरे लिए सरकारी तौर पर कोई निश्चित आश्वासन दे पाना अत्यंत कठिन है। लेकिन सरकार के प्रतिनिधित्व के बजाय
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 15 मई, 1951, पृष्ठ 8806-9