34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 523

508 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रश्न हैः

फ्कि खंड 23, विधेयक का भाग है।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 23, विधेयक में जोड़ा गया।

माननीय उपाध्यक्षः अब नया खंड 23क, प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। क्या खंड 24 को प्रस्तुत करने का समय बचा है?

माननीय सदस्यः नहीं, श्रीमन्।

तदोपरांत सदन को बुधवार, 16 मई, 1951 के साढ़े आठ बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकप्रतिनिधित्व (सं. 2)µजारी

ऽखंड 24 (मतदान केंद्रों के लिए पीठासीन अधिकारी)

माननीय उपाध्यक्षः संशोधन प्रस्तुत हैः

खंड 24 के उप-खंड (1) में फ्चुनाव में या उसके बारे में शब्दों के स्थान पर फ्विचारधीन चुनाव मेंय् शब्द प्रतिस्थापित करें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मुझे यह स्वीकार्य नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः क्या मैं संशोधन सं. 299 तथा 300 को मतदान के लिए प्रस्तुत कर दूँ?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं केवल संशोधन सं. 299 को मतदान के लिए रखना चाहूँगा। अगर वह अस्वीकृत हो जाता है, तो संशोधन सं. 300 की जरूरत नहीं होगी।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारी (मद्रास)ः क्या मैं माननीय विधि मंत्री से कह सकता हूँ कि वे इस संशोधन में फ्चुनाव के बारे मेंय् शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसका उत्तर आसान है। ‘चुनाव’ शब्द को सीमित अर्थ में प्रयोग किया जा सकता है, अर्थात् चुनाव की वह प्रक्रिया, जब मतदान होता है। दूसरी ओर चुनाव का विस्तृत अर्थ भी होता है, जिसमें मतदान के अतिरिक्त भी अनेक संबंधित कार्य किए जाते हैं। यही कारण है, यह शब्द यहाँ है। ठीक यही शब्द कानून में भी है।

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 19 मई, 1951, पृष्ठ 9098-9105