34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 526

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इसमें विद्यमान शब्द फ्यदि आवश्यक होय् शब्दों से एक शर्त व्यक्त होती है, जब कि मेरे द्वारा सुझाए गए फ्जहाँ आवश्यक होय् शब्दों में यथावसर का संदर्भ है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह स्वीकार नहीं कर रहा।

माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः

खंड 28 के भाग (घ) में फ्यदि आवश्यक होय् शब्दों के स्थान पर फ्जहाँ आवश्यक होय् शब्द प्रतिस्थापित करें।

प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।

श्री मीरनः अब मैं संशोधन सं 328 को, जो मेरे नाम पर है, थोड़े परिवर्तित रूप में, जो माननीय विधि मंत्री को भी स्वीकार्य है, प्रस्तुत कर रहा हूँः

खंड 31 के उप-खंड (5) के बाद निम्न उप-खंड शामिल करेंः

फ्5(क)ः यदि नामांकन-पत्र प्रस्तुत करते समय चुनाव अधिकारी को पता चलता है कि उम्मीदवार का नाम उस मतदाता-सूची में दर्ज नहीं है, जिसका वह चुनाव अधिकारी है, तो वह उप-खंड (5) के अनुसार इस उम्मीदवार को नामांकन-पत्र के साथ उस मतदाता-सूची की प्रति प्रस्तुत करने को कहेगा।

मुझे नहीं लगता कि इस बारे में मुझे ज्यादा कुछ कहना चाहिए, क्योंकि माननीय मंत्री जी इस संशोधन से सहमत हो चुके हैं।

माननीय अध्यक्षः संशोधन प्रस्तुत है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं भी इसी प्रकार के एक संशोधन के बारे में नोटिस दे चुका हूँ। इसलिए मैं इस संशोधन से सहमत हूँ।

श्री श्यामनंदन सहायः इस बारे में खंड 5 के लिए मेरा भी एक संशोधन था। मुझे लगता है, कि मतदाता-सूचियों की प्रतियों की आपूर्ति में लगने वाली भारी लागत का बोझ उम्मीदवार पर क्यों डाला जाए? इसके लिए निर्वाचन-क्षेत्र की मतदाता-सूची की संबंधित प्रविष्टियों की केवल एक प्रति क्यों न बना दी जाए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वहाँ पहले ही फ्याय् शब्द है।

श्री श्यामनंदन सहायः जी हाँ, मैं स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा हूँ। इस मामले में विकल्प चुनाव अधिकारी के पास है।

श्री आर.के. चौधरीः मुझे अपने माननीय मित्र द्वारा प्रस्तुत किए संशोधन पर घोर आपत्ति है। लेकिन, विभिन्न स्थानों पर कार्यरत चुनाव अधिकारियों के निर्णयों में