34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 528

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अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, कोई भी उम्मीदवार तब तक उस सीट को भरने के लिए चुने जाने योग्य नहीं माना जाएगा, जब तक उसका नामांकन पत्र विहित विधि से सत्यापित इस घोषणा के साथ संलग्न न हो, कि वह उस अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है, जिसके लिए वह सीट आरिक्षत है....य्

हमने अपने अनुभवों से यह पाया है कि कभी-कभी चुनाव अधिकारी संदिग्ध दृष्टिकोण अपना लेता है। अन्यथा इन नामांकनों में इतनी ज्यादा कठिनाइयां न होतीं और न ही इतने ज्यादा चुनावी याचिकाएं और मुकदमें होते। इसी स्थिति को स्पष्ट करने की इच्छा से मैंने ‘उम्मीदवार’ के साथ ‘आरक्षित सीटों के लिए’ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।

माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय सदस्य ने इस परन्तुक में फ्उस सीट को भरने के लिएय् शब्दों को नहीं देखा है?

श्री श्यामनंदन सहायः जी हाँ, इसमें आगे यह भी कहा गया है फ्जिसके लिए वह सीट आरक्षित हैय्। मैंने यह सब देख लिया है। लेकिन मैं यह संशोधन इसलिए सुझा रहा हूँ, ताकि स्पष्ट रहे, क्योंकि जहाँ भी आरक्षण होता है, वहाँ एक सीट आरक्षित होती है और दूसरी सीट सामान्य सीट भी होती है। इसलिए यदि हम इन शब्दों को जोड़ दें, तो मुझे लगता है स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है, अतः ऐसे किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है।

श्री श्यामनंदन सहायः तो मैं इस पर जोर नहीं दूँगा।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय (उत्तर प्रदेश)ः मैं पूरक सूची के अपने संशोधन सं. 317 को प्रस्तुत नहीं करना चाहता। पर मैं माननीय मंत्री जी को एक सुझाव देना चाहता हूँ, जिसे वे स्वीकार कर सकते हैं।

मेरा निवदेन है कि वाक्यांश फ्और जो, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 में उल्लिखित अनर्हता का पात्र नहीं हैय् शब्दों और पंक्तियों को जोड़े, जिनका कोई अर्थ न निकलता हो? मैं इसी के बारे में निवेदन करना चाहता हूँ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं भी समझता हूँ, यह एक किफायती उपाय होगा।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः तथ्य यही है कि ये शब्द पूर्णतः अनावश्यक हैं, क्योंकि यदि कोई मतदाता है, तो वह इस ढंग से अनर्ह नहीं हो सकता। यह किसी मतदाता की वह अर्हता है, जिसका इसमें उल्लेख है, और जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 में दी गई है। अतः मेरा निवेदन है, यह पूर्णतः फालतू है।