34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 529

514 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अस्पष्ट रहने से फालतू होना बेहतर है।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः मैं नहीं समझता इससे कोई अस्पष्टता पैदा होगी।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री को यह स्वीकार्य नहीं है।

ऽपंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः खंड 31 उप-खंड (2) के विद्यमान परन्तुक से पहले निम्नलिखित नया परन्तुक शामिल कर लेंः

फ्परन्तु जिसका नाम निर्वाचन-क्षेत्र की मतदाता-सूची में दर्ज है, वह व्यक्ति एक ही उम्मीदवार के एक से अधिक नामांकन-पत्र पर प्रस्तावक या समर्थक बन सकता है।य्

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह स्वीकार नहीं कर सकता।

माननीय उपाध्यक्षः मैं इसे सदन के समक्ष प्रस्तुत नहीं करूँगा।

श्री ए.सी. गुहा (पं. बंगाल)ः मैं इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण चाहता हूँ।

माननीय उपाध्यक्षः मुद्दा निपटा दिया गया है। यह संशोधन प्रस्तुत नहीं किया गया है।

श्री ए.सी. गुहाः मैं यह स्पष्टीकरण चाहता हूँ कि क्या सरकार की यह इच्छा है कि कोई व्यक्ति, एक ही उम्मीदवार के लिए एक से ज्यादा नामांकन-पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता।

माननीय उपाध्यक्षः यह संशोधन प्रस्तुत नहीं किया गया है और सदन के समक्ष भी नहीं रखा गया है।

श्री सोनावाने (बम्बई)ः मैं खंड 31 के उप-खंड (3) के प्रथम परन्तुक के संबंध में कुछ स्पष्टीकरण चाहता हूँ, जिसमें कहा गया हैः

फ्...जब तक उसका नामांकन-पत्र विहित विधि से सत्यापित इस घोषणा के साथ संलग्न न हो कि वह उस अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है, जिसके लिए...य्

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस पर चर्चा हो चुकी है।

श्री सोनावनेः मैं कुछ स्पष्टीकरण चाहता हूँ। जहाँ तक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 19 मई, 1951, पृष्ठ 2128-29