34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 530

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के नामांकन का संबंध है, मैं यह जानना चाहता हूँ कि एक आरक्षित सीट के मामले में सत्यापन की प्रक्रिया क्या होगी? यहाँ यह कहा गया हैµफ्विहित विधि से सत्यापित घोषणा।य् इसमें प्रक्रिया किन्हीं नियमों द्वारा निश्चित की जाएगी। जहाँ तक मेरी जानकारी है, वे नियम, मेरी इच्छा के बावजूद सदन के समक्ष नहीं आ पाएंगे। इसलिए हम जानना चाहते हैं, सत्यापन की प्रक्रिया क्या होगी? नहीं तो, वह हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। मान लीजिए, हमें किसी मजिस्ट्रेट के पास जाकर, शपथ-पत्र देने को कहा जाता है, तो उसमें काफी समय लगेगा। यदि यह एक सरल प्रक्रिया हो, जैसे डॉ. अम्बेडकर से एक प्रमाण-पत्र प्राप्त करना हो, क्योंकि वे अनुसूचित जातियों के एक मार्गदर्शक सदस्य हैं। इसलिए यही पर्याप्त और स्वीकार्य होना चाहिए और यही पर्याप्त सत्यापन होना चाहिए। हमें किसी दलाल के पास जाने को नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि वहां प्रतीक्षा करनी होगी और तरह-तरह के काम करने होंगे। मान लीजिए कोई स्थानीय जे.पी. है और अगर वही इस तरह का प्रमाण-पत्र दे देता है कि संबंधित व्यक्ति अनुसूचित जाति का है, तो उसी प्रमाण-पत्र को स्वीकार कर लेना चाहिए। यदि कोई काफी बार में अपना नामांकन दाखिक करके चुनाव लड़ने का निर्णय करता है और उसे तमाम तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़े, तो उसके लिए बहुत परेशानी होगी। अतः इस प्रक्रिया को सरल बनाने की दृष्टि से मैं माननीय विधि मंत्री से निवेदन करता हूँ कि एक सामान्य विधि का पालन किया जाए। इसके लिए यदि कोई स्थानीय प्रतिष्ठित व्यक्ति या ‘जस्टिस आफ दी पीस’ एक प्रमाण-पत्र दे देता है, तो वही स्वीकार्य होना चाहिए।

श्री रामास्वामी नायडू (मद्रास)ः खंड 31 के उप-खंड (3) के दूसरे परन्तुक का अंतिम अंश इस प्रकार हैः

फ्...जब तक उसका नामांकन-पत्र विहित विधि से सत्यापित इस घोषणा के साथ संलग्न न हो कि वह उम्मीदवार उस जिले की किसी अनुसूचित जनजाति का सदस्य है...य्

अतः में मैं यह जानना चाहता हूँ फ्उस जिले कीय् शब्द, क्या यह संकेत नहीं करते कि वह उस जिले का निवासी हो।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ, ऐसा ही है।

श्री रामास्वामी नायडूः मैं यह जानना चाहता हूँ, क्या किसी दूसरे जिले का कोई निवासी, चाहे वह उस जिले की किसी अनुसूचित जनजाति का सदस्य हो, उस निर्वाचन-क्षेत्र से चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाएगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बिल्कुल नहीं। उसकी व्यवस्था है।