7. यथा अनुकूलित भारत अधिनियम, 1946 की धरा 2 और 3 में वणि्र्ात अवधि के विस्तार के संबंध में संकल्प - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽधारा 2 और 3 में उल्लिखित अवधि के विस्तार के संबंध में संकल्प यथा अनुकूलित भारत केन्द्रीय सरकार और विधानमंडल

अधिनियम, 1946

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव पेश करता हूँः

फ्कि भारत (अनंतिम संविधान) आदेश, 1947 द्वारा यथा अनुकूलित भारत (केन्द्रीय सरकार और विधानमंडल) अधिनियम, 1946 की धारा 4 के परन्तुक के अनुसरण में यह सभा उक्त अधिनियम की धारा 2 और 3 में उल्लिखित का विस्तार अवधि 1 अप्रैल, 1948 से प्रारम्भ होने वाली बारह मास की और अवधि तक अनुमोदित करती है।य्

अब श्रीमन्, मेरे लिए यह आवश्यक नहीं है कि इस संकल्प के समर्थन में बहुत विस्तृत चर्चा करूँ। मेरा सदन को यह बताना पर्याप्त होगा कि केन्द्रीय विधानमंडल ने वस्तुओं पर नियंत्रण अधिरोपित करने, भूमि का अधिग्रहण करने आदि जैसे विषयों पर, जो केवल प्रांतीय सूची में हैं, अनेक विधान पारित किए हैं। केन्द्र इस शक्ति का प्रयोग करने में इसलिए समर्थ रहा क्योंकि युद्ध छिड़ जाने के कारण गवर्नर जनरल द्वारा आपात्काल की उद्घोषणा कर दी गई थीः और जैसा कि सदन को ज्ञात है, क्योंकि उद्घोषणा गवर्नर जनरल द्वारा जारी की गई थी, इसलिए केन्द्रीय विधानमंडल को कोई भी आदेश पारित करने या इस तथ्य के होते हुए भी कोई विधि पारित करने की आवश्यक शक्ति प्राप्त हो गई थी कि वह विषय प्रांतीय विधायी सूची के अंतर्गत है। भारत शासन अधिनियम में यह भी उपबंध है कि प्रांतीय विषयों पर विधान बनाने की यह शक्ति आपात्काल की उद्घोषणा वापस लिए जाने के छह मास के पश्चात् समाप्त हो जाएगी। अब यह शक्ति वर्ष 1946 में समाप्त हो गई थी। आज की सरकार यह महसूस करती है कि यद्यपि तकनीकी तौर पर आपात्काल समाप्त हो चुका है, फिर भी वस्तुतः केन्द्रीय विधानमंडल द्वारा अधिरोपित नियंत्रणों को जारी रखा जाना अत्यावश्यक है। ऐसा कोई तरीका नहीं था जिसके द्वारा आपात्काल की समाप्ति पर केन्द्रीय विधानमंडल अपने नियंत्रण को जारी रखने की शक्ति प्राप्त कर सके और इसीलिए, केन्द्रीय विधानमंडल के ब्रिटिश संसद, जो इस समय एकमात्र प्राधिकरण था, से संपर्क किया जो केन्द्रीय विधानमंडल को ऐसी शक्तियां प्रदत्त कर सकती थी जिससे वह इस मामले में सम्यक् उपबंध कर सके और संसद ने, जैसा कि सदन को याद होगा, भारत (केन्द्रीय सरकार और विधानमंडल) अधिनियम, 1946 नामक एक अधिनियम वर्ष 1946 में पारित किया।

ऽसं. स. (वि.) वा., खंड II, 25 फरवरी, 1948, पृष्ठ 1228-29