516 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चौधरी रणबीर सिंहः मुझे एक संदेह है और मैं उसे दूर कर लेना चाहता हूँ। इसमें एक व्यवस्था यह हैः
फ्शर्त यह भी है कि खंड 7 के उपखंड (1) की धारा (च) में उल्लिखित पदासीन व्यक्ति बर्खास्त कर दिया गया हो और पाँच वर्षों की अवधि...य्
मैं सोचता हूँ कि ‘आजाद हिंद फौज’ के सैनिक और अधिकारी इससे प्रभावित नहीं होंगे और यही मैं जानना चाहता हूँ? क्या वे इस धारा के कारण वंचित कर दिए जाएँगे? यदि ऐसा हो तो कोई ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे उन लोगों को चुनावों में भाग लेने का अधिकार मिल सके।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं पूरी तरह से समझ नहीं पाया कि पिछले वक्ता ने क्या कहा है। पर मैं उप-खंड (3) की व्यवस्था के संबंध में कुछ टिप्पणी करना चाहूँगा, जो उस प्रक्रिया के संबंध में है, जिससे यह पता चले कि कोई उम्मीदवार अनूसचित जाति का है। जिस माननीय सदस्य ने यह मुद्दा उठाया है, उसे बेशक इसका अनुभव नहीं है कि कितने सारे लोग स्वयं को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि कानून के अंतर्गत उन्हें भी वे लाभ मिल सकें, जो उस जाति को दिए गए हैं।
श्री श्यामनंदन सहायः इस तरह के और भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, और ज्यादा लोग इस तरह आ सकते हैं। मैंने सरकार के एक सदस्य के रूप में स्वयं इस तरह के अनुभव किए हैं। उदाहरणार्थ, कोई हिंदू छह महीनों तक अपनी दाढ़ी बढ़ाकर सिख बन जाता है और सिखों के लिए आरक्षित नौकरी प्राप्त कर लेता है। उसके बाद फिर से दाढ़ी कटवाकर हिंदुओं में शामिल हो जाता है। इसीलिए भारत सरकार ने एक नियम बनाया है कि किसी व्यक्ति को आरक्षित श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए, विहित प्राधिकारी से एक प्रमाण-पत्र प्राप्त करके देना होगा, कि वह व्यक्ति उस श्रेणी का है। इस तरह की व्यवस्था निस्संदेह, बिना किसी शक के, अनुसूचित जातियों के भी हित में होगी। मैं निश्चित तौर पर नहीं बता सकता कि इस बारे में आयुक्त स्वयं किस तरह प्रक्रिया निश्चित करेगा, ताकि आरक्षित सीटों पर अनुसूचित जाति के अतिरिक्त अन्य कोई खड़ा न हो सके। मैं सोच सकता हूँ कि इसमें कोई हानि भी नहीं होगी, यदि ऐसा नियम बना दिया जाए कि प्रत्येक व्यक्ति को, जो अपना नामांकन-पत्र, आरक्षित सीट के लिए देना चाहता है, अपने शपथ-पत्र के आधार पर किसी मजिस्ट्रेट से एक प्रमाण-पत्र, उसके समक्ष उपस्थित होकर हस्ताक्षर करके प्राप्त करना चाहिए कि उनकी जानकारी के अनुसार वह व्यक्ति, अनुसूचित जाति का है।