34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 533

518 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसलिए मैं यह उचित समझता हूँ कि इसे रखा जाए।

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य चाहते हैं कि मैं इस संशोधन को अब मतदान के लिए प्रस्तुत कर दूँ?

श्री श्यामनंदन सहायः इस बारे में अन्य सदस्य भी कुछ कहना चाहेंगे। अतः अभी मैं इस संशोधन को सानुमति वापस लेता हूँ।

संशोधन, सानुमति वापस लिया गया।

ऽश्री पंडित कुंजरु (उत्तर प्रदेश)ः मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँः

खंड 34 के उप-खंड (5) में निम्न परन्तुक जोड़ेंः

फ्परन्तु यदि कोई आपत्ति की गई है, तो संबंधित उम्मीदवार को अगले दिन तक उसके खंडन की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन बाद में कोई दिन निश्चित करके जांच करके, चुनाव अधिकारी को कार्रवाई स्थगित करके अपना निर्णय लिपिबद्ध कर देना चाहिए।य्

श्री सोनावनेः एक व्यवस्था का प्रश्न है। माननीय सदस्य ने इस बारे में सदन को कोई सूचना नहीं दी है और पहले ही अध्यक्ष महोदय यह कह चुके हैं कि इस सदन में अकस्मात् कुछ नहीं किया जाना चाहिए। अतः मैं जानना चाहता हूँ क्या इस प्रकार प्रस्तुत यह संशोधन स्वीकार किया जा सकता है?

पंडित कुंजरुः उप-खंड (5) में कहा गया है...

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कार्रवाई को छोटा करने की खातिर मैं कहूँगा कि मैं यह संशोधन स्वीकार कर रहा हूँ।

माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री, जो प्रभारी हैं, इस संशोधन को स्वीकार कर रहे हैं।

ऽऽपंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः मैं कुछ माननीय सदस्यों की आपत्तियों को दोहराऊँगा नहीं। इस संशोधन की स्वीकृति से उत्पन्न कुछ कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, मैं मुद्रित सूची में संशोधन सं. 348 का सुझाव दूँगा। अर्थात् फ्कार्रवाई का स्थगनय् के साथ फ्दूसरे दिन के आगेय् शब्द शामिल कर लिए जाएं। इससे सभी कठिनाइयां दूर हो जाएंगी। यानीः फ्चुनाव अधिकारी, खंड 28 के उप-बंध (ख) के अंतर्गत निश्चित तिथि को जाँच करेगा और कार्रवाई का स्थगन, दूसरे दिन के आगे नहीं किया जाएगा, सिवाय...य्

मैं नहीं समझता कि इस संशोधन को स्वीकार करने में कोई कठिनाई होगी।

ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 19 मई, 1951, पृष्ठ 9158-59

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 19 मई, 1951, पृष्ठ 9163-66