34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 534

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस प्रश्न से इतने कि उत्तर प्रदेश और अन्य प्रांतों में इस संशोधन में सुझाए नियम मौजूद हैं, मैं सोचता हूँ कि सदन को इस मामले पर इसकी गुणात्मकता पर विचार करना चाहिए। चुनाव अधिकारी का कार्य क्या है? उसका कार्य खंड 24 के उप-खंड (2) में तय किया गया है कि वह उसमें बताए (क) से (ड) तक के मुद्दों पर निर्णय करेगा। वे ऐसी संभावित आपत्तियाँ हैं, जो एक उम्मीदवार, दूसरे के विरुद्ध उठा सकता है। मुझे लगता है कि यदि उम्मीदवार एक ऐसी आपत्ति से मुकर जाता है, जैसी (ख) के अंतर्गत है, अर्थात् फ्उम्मीदवार, इस अधिनियम या संविधान के अनुसार उस सीट को भरने के लिए चुने जाने के लिए अनर्ह हैय्, या वह (ड) के अंतर्गत इस आपत्ति से घिर जाता है कि उम्मीदवार, उसके प्रस्तावक या समर्थक के हस्ताक्षर असली नहीं हैं या गलत ढंग से प्राप्त किए हैं, तो मुझे लगता है कि उसके लिए यह कठिन होगा कि वह उन आरोपों का उत्तर यथास्थान दे सके। अतः समानता की दृष्टि से यह जरूरी है कि उम्मीदवार को कुछ समय इसके लिए दिया जाए कि वह अपने आरोप को दूर करने के निमित्त किसी लिखित या मौखिक साक्ष्य के लिए किसी गवाह को पेश कर सके। और इसी आधार पर मैंने महसूस किया है कि इस संशोधन को स्वीकार कर लिया जाए, क्योंकि इसके न होने पर उम्मीदवार को यह अनुमति मिल जाएगी कि वह दूसरे उम्मीदवार को अपने आरोपों को हटाने के लिए कोई समय न मिलने से आश्चर्यचकित कर दे। मैं सोचता हूँ, यह ऐसा संशोधन है, जिसने मुझे प्रभावित किया है और यह सभी को अच्छा लगेगा।...

श्री संथानमः क्या चुनाव अधिकारी के लिए यह संभव होगा कि वह उन नामांकनों को स्वीकार कर लें, जिनके विरुद्ध कोई आपत्ति नहीं है? उसे सभी नामांकनों के बारे में एक साथ निर्णय करना होता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जो व्यक्ति नामांकन-पत्र प्राप्त कर रहा है, उसे हड़बड़ी की क्या जरूरत है? उसे तो उन नामांकनों को अंतिम तारीख तक स्वीकार करना है। अतः इसमें कोई हानि नहीं होगी कि वह यह कार्य अंतिम दिन करे। यही इस संशोधन में कहा गया है। यह संशोधन बहुत स्पष्ट है। चुनाव अधिकारी को अपना निर्णय उस तारीख को दे देना चाहिए, जिस तक के लिए कार्रवाई स्थगित कर दी गई है। चुनाव अधिकारी के पास ऐसा कोई विवेकाधिकार नहीं है कि वह अपने निर्णय को स्थगित कर दे।

श्री संथानमः क्या आपत्ति पर स्थगन वाले दिन विचार नहीं किया जा सकता? इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। मान लीजिए किसी अन्य दिन आपत्ति उठा दी जाए, तो?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आपत्ति उसी दिन उठाई जानी चाहिए, जब जाँच आरंभ हो। जाँच वाले दिन के अलावा अन्य किसी भी दिन आपत्ति नहीं की जा सकती।