520 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः श्री श्यामनंदन सहाय और श्री हुसेन इमाम का प्रश्न हैः क्या ऐसी किसी आकस्मिता के लिए कोई व्यवस्था है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। क्या कोई ऐसी व्यवस्था कर सकता है? क्या कोई बता सकता है कि दंगे कब खत्म होंगे? बम्बई में एक बार दंगे उनतीस दिनों तक चलते रहे। इसलिए यह बात चुनावी अधिकारी पर छोड़ देनी चाहिए कि शांतिपूर्ण वातावरण है और वह जाँच कर सकता है। क्या कोई कह सकता है कि यदि चुनाव अधिकारी अपनी जाँच पहले दिन स्थगित कर देता है, क्योंकि दंगे हो रहे हैं, तो क्या वह दूसरे या तीसरे दिन जाँच कर सकता है? दंगे जारी रह सकते हैं।
माननीय उपाध्यक्षः यह केवल समय के बारे में है। लेकिन कुछ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि चुनाव अधिकारी अपनी जाँच कर सके।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे ऐसा लगता है कि यह उस उपबंध में रचतः अंतर्निहित है। यों हमारे नाटककारों की एक आदत होती है। अगर मैं कहूँ कि अगर कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसका मृत शरीर मंच पर दिखाना चाहिए, अन्यथा दर्शक विश्वास नहीं कर पाएँगे। पर मैंने कहा है कि इस उपबंध में अधिकांश बातें अंतर्निहित हैं।
माननीय उपाध्यक्षः अब मैं पंडित कुंजरु के संशोधन को मतदान हेतु प्रस्तुत कर रहा हूँ।
प्रस्ताव (पहले से यथा प्रस्तावित) अंगीकार किया गया।
श्री श्यामनंदन सहायः मेरे पास एक संशोधन, पूरक सूची सं. 3 में सं. 24 प्रस्तुत करने के लिए हैं। मैं उसे प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 34 के उप-खंड (4) में फ्इंकारय् शब्द के स्थान पर फ्अस्वीकारय् शब्द प्रतिस्थापित करें।
माननीय मंत्री जी ने बताया है कि फ्इंकारय् शब्द नामांकनों के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है और फ्अस्वीकारय् शब्द नामांकन-पत्रों के संबंध में प्रयुक्त हुआ है। मैं उसका ध्यान खंड 34 के उप-खंड (4) की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जहाँ फ्इंकारय् शब्द को नामांकन-पत्रों के निर्देश में प्रयुक्त किया गया है। अतः यहाँ पर फ्अस्वीकारय् शब्द को स्वीकार करना चाहिए।
माननीय उपाध्यक्षः संशोधन प्रस्तावित हैः
खंड 34 के उप-खंड (4) में फ्इंकारय् शब्द के स्थान पर फ्अस्वीकारय् शब्द प्रतिस्थापित कर दें।