34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 536

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि इससे मेरे मित्र की सुरुचिपूर्ण भावना को ठेस पहुंचती हैं, तो मुझे भी उन्हें संतुष्ट करके प्रसन्नता होगी।

माननीय उपाध्यक्षः क

श्री श्यामनंदन सहायः वास्तविकता को देखते हुए, इस सदन में हमें अपने सामने बैठे लोगों की सुरुचि का ख्याल रखना चाहिएµलेकिन हमारी सुरुचि पर कोई भी ध्यान नहीं देता।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसीलिए मैं अपने मित्र का संशोधन स्वीकार कर रहा हूँ।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः जहाँ तक नामांकनों की जाँच का संबंध है, क्या मैं बता सकता हूँ, श्रीमन्, कि खंड 28 (ग), जो सदन में पारित हो गया है, उसके बारे में निर्देश दे दिया जाए कि उसे तीसरे पठन में यथोचित संशोधित कर दिया जाए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ, मेरे पास इस समय एक अन्य संशोधन भी प्रस्तुत करने के लिए है।

माननीय उपाध्यक्षः मैं अब श्री सहाय का संशोधन मतदान हेतु प्रस्तुत कर रहा हूँ। प्रश्न हैः

खंड 34 के उप-खंड (4) में फ्इंकारय् शब्द के बजाय फ्अस्वीकारय् शब्द प्रतिस्थापित कर दें।

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

ऽडॉ. देशमुखः मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँः

खंड 34 के उप-खंड (4) में फ्महत्वपूर्णय् शब्द के बाद फ्और अत्यावश्यकय् शब्दों को शामिल कर लें।

महोदय, मैं फ्और अत्यावश्यकय् शब्दों को क्यों शामिल करना चाहता हूँ, इसका कारण यह है कि फ्महत्वपूर्णय् शब्द का अर्थ निश्चित नहीं है। मैंने इसके लिए शब्दकोश भी देखा है और फ्महत्वपूर्णय् शब्द के कई अर्थ पाए हैं। इसमें तत्व, पदार्थ, वास्तविक, ठोस आदि अनेक अर्थ शामिल हैं, क्योंकि वे भी जरूरी यानी फ्महत्वपूर्णय् हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः और फ्अत्यावश्यकय् शब्द का क्या अर्थ है?

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 19 मई, 1951, पृष्ठ 9166-67